बीजिंग। भारत ने चीन के साथ सीमा तनाव को कम करने और बेहतर संबंध स्थापित करने के लिए चार सूत्री फॉर्मूला प्रस्तावित किया है। यह प्रस्ताव शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने चीनी समकक्ष डोंग जुन के समक्ष रखा। यह कदम भारत-चीन सीमा पर लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने और शांति स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पहला सूत्र पूर्ण सैन्य वापसी पर जोर देता है। भारत चाहता है कि 2020 से पहले की स्थिति बहाल हो, खासकर डेपसांग और डेमचोक जैसे क्षेत्रों में, जहां हाल के वर्षों में तनाव बढ़ा था। दूसरा सूत्र सीमा पर तनाव कम करने के लिए ठोस कदम उठाने पर केंद्रित है, जिसमें सैन्य उपस्थिति को कम करना और उकसावे वाली कार्रवाइयों से बचना शामिल है।
कई क्षेत्रों में सीमा अस्पष्टता तनाव का प्रमुख कारण
तीसरा सूत्र सीमा निर्धारण (डेलिमिटेशन) और सीमांकन (डेमार्केशन) की प्रक्रिया को तेज करने पर बल देता है, क्योंकि कई क्षेत्रों में सीमा अस्पष्टता तनाव का प्रमुख कारण है। पारदर्शी और त्वरित प्रक्रिया से इसे स्पष्ट करने की बात कही गई है। चौथा सूत्र आपसी विश्वास और सहयोग को बढ़ाने पर केंद्रित है, जिसमें संयुक्त गश्त और स्थानीय स्तर पर सैन्य कमांडरों के बीच नियमित संवाद शामिल है।
डेपसांग और डेमचोक में सैन्य वापसी और गश्ती शुरू
यह प्रस्ताव 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद हुए तनाव के बाद आया है, जिसमें दोनों पक्षों के सैनिकों की जान गई थी। हाल के वर्षों में डेपसांग और डेमचोक में सैन्य वापसी और गश्ती शुरू होने से कुछ प्रगति हुई है, लेकिन पूर्ण शांति के लिए और प्रयासों की जरूरत है। राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि सीमा पर शांति भारत-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फॉर्मूला दीर्घकालिक शांति और स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, बशर्ते दोनों पक्ष इसे लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हों।
