पुरी। ओडिशा में 27 जून को भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा शुरू हुई। यह वार्षिक उत्सव लाखों भक्तों को आकर्षित करता है। इसे रथ यात्रा या छठी यात्रा के नाम से जाना जाता है। इस बार, भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचे। रथ यात्रा श्रीमंदिर से शुरू होकर गुंडिचा मंदिर तक 3 किलोमीटर की यात्रा पर निकली, जो नौ दिनों तक चलती है।
यात्रा की शुरुआत मंगल आरती के साथ सुबह 6 बजे हुई, जिसके बाद सूर्य पूजा और छेरा पंहरा जैसे पारंपरिक अनुष्ठान किए गए। छेरा पंहरा में पुरी के गजपति महाराज ने रथों की प्रतीकात्मक सफाई की। तीन भव्य रथ- नंदीघोष (जगन्नाथ), तलध्वज (बलभद्र) और दर्पदलन (सुभद्रा) को भक्तों ने उत्साहपूर्वक खींचा। रथों को जटिल नक्काशी, रंग-बिरंगे कपड़ों और फूलों की मालाओं से सजाया गया था।
तीर्थयात्रियों के लिए पांच स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू
पुरी में सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए। करीब 10,000 सुरक्षाकर्मी, जिनमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की आठ कंपनियां शामिल थीं, तैनात किए गए। 275 से अधिक एआई-सक्षम सीसीटीवी कैमरे और एनएसजी की उपस्थिति के साथ सुरक्षा को और मजबूत किया गया। ओडिशा पुलिस और प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पांच स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की।
माना जाता है कि रथ खींचने से पापों का नाश होता है
रथ यात्रा का आध्यात्मिक महत्व गहरा है। माना जाता है कि रथ खींचने से पापों का नाश होता है और भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह उत्सव समानता और भक्ति का प्रतीक है, जिसमें सभी जाति-धर्म के लोग शामिल हो सकते हैं। पुरी के अलावा, अहमदाबाद, कोलकाता और दिघा जैसे शहरों में भी रथ यात्रा का आयोजन हुआ। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अहमदाबाद में मंगल आरती में हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी भक्तों को शुभकामनाएं दीं। यह उत्सव ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन को बढ़ावा देता है।
