नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और संघर्ष का असर आम नागरिकों पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कैबिनेट बैठक में जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय संकट की वजह से महंगाई बढ़नी नहीं चाहिए और पेट्रोल, डीजल, गैस जैसी जरूरी चीजों की कीमतें स्थिर रहनी चाहिए। उनका मुख्य फोकस आम आदमी की जेब की सुरक्षा और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति पर है, ताकि घरेलू बाजार में कोई कमी या अस्थिरता न आए।
सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। क्रूड ऑयल के आयात को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता कम कर करीब 70 प्रतिशत हिस्सा सुरक्षित वैकल्पिक मार्गों से पूरा किया जा रहा है। घरेलू रिफाइनरियां पूरी क्षमता से चल रही हैं और हाल ही में एलपीजी उत्पादन में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। नए कंसाइनमेंट भी जल्द आ रहे हैं, जिससे स्टॉक मजबूत हो रहा है।
चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपटने में सक्षम
पेट्रोल-डीजल के निर्यात पर कोई रोक नहीं लगाई गई है और अधिकारी आश्वस्त हैं कि भारत वैश्विक चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपटने में सक्षम है। विशेष रूप से एलपीजी आपूर्ति पर ध्यान दिया जा रहा है, जहां कमर्शियल और घरेलू दोनों क्षेत्रों को प्राथमिकता मिल रही है। रेस्टोरेंट एसोसिएशन की शिकायतों को दूर करने के लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को उनके साथ सीधा संपर्क करने के आदेश दिए गए हैं।
कीमतों में नहीं आएगा उछाल
आईओसी, एचपीसीएल और बीपीसीएल के कार्यकारी निदेशकों की एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है, जो आपूर्ति की निगरानी करेगी, जरूरतों के अनुसार प्राथमिकता तय करेगी और किसी भी कमी को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाएगी। सरकार का साफ संदेश है कि पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में कोई बड़ा उछाल नहीं आएगा। ऊर्जा सुरक्षा, विविधीकरण और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की रणनीति से भारत कई अन्य देशों से बेहतर स्थिति में है। इससे आम लोगों को महंगाई या कमी का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा और आर्थिक स्थिरता बनी रहेगी।
