नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष द्वारा लाए गए ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद द्वारा पेश किया गया था, जिस पर 118 से अधिक विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर थे। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि स्पीकर ने निष्पक्षता खो दी है, विपक्षी सदस्यों को बोलने से रोका, माइक बंद किए और सत्ता पक्ष के प्रति पक्षपात बरता, विशेष रूप से राहुल गांधी को महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने का मौका नहीं दिया।
बहस के दौरान विपक्ष ने सदन की गरिमा और संवैधानिक पदों की रक्षा का मुद्दा उठाया। गौरव गोगोई, जयराम रमेश, महुआ मोइत्रा और असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं ने स्पीकर की भूमिका पर सवाल उठाए, उपसभापति पद की लंबे समय से खाली रहने और अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को पक्षपातपूर्ण बताया। विपक्ष ने इसे संस्थागत संकट करार दिया और स्पीकर से इस्तीफे की मांग की। सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया और प्रस्ताव को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया।
अमित शाह ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण
गृह मंत्री अमित शाह ने इसे ‘खेदजनक’ और ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ कहा, कहा कि यह संवैधानिक पदों की गरिमा को ठेस पहुंचाता है। उन्होंने राहुल गांधी पर विदेश यात्राओं और संसदीय मर्यादा न समझने का तंज कसा, साथ ही कहा कि भाजपा ने कभी विपक्ष में रहते ऐसे प्रस्ताव नहीं लाए। किरेन रिजिजू और अन्य भाजपा सांसदों ने स्पीकर की निष्पक्षता का बचाव किया।
सदन अगले दिन तक स्थगित कर दिया गया
लगभग 10 घंटे की तीखी बहस और हंगामे के बाद ध्वनि मत से प्रस्ताव खारिज हो गया, जिसके बाद सदन अगले दिन तक स्थगित कर दिया गया। एनडीए के स्पष्ट बहुमत के कारण प्रस्ताव के सफल होने की कोई संभावना नहीं थी। यह घटना संसद में बढ़ते राजनीतिक तनाव और स्पीकर की भूमिका पर बहस को और उजागर करती है, हालांकि ओम बिरला अपनी कुर्सी पर बने रहेंगे।
