नई दिल्ली। ईरान से जुड़े मिडिल ईस्ट युद्ध का असर अब भारत के पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर बाजार पर भी पड़ रहा है। वैश्विक तेल कीमतें तेजी से बढ़ने और सप्लाई चेन में आई बाधाओं के कारण बोतलबंद पानी बनाने वाली कंपनियों की उत्पादन लागत में भारी उछाल आया है। भारत का यह बाजार करीब 5 अरब डॉलर (लगभग 45 हजार करोड़ रुपये) का है, जो दुनिया के सबसे तेज बढ़ते बाजारों में शुमार है। गर्मियों के मौसम से ठीक पहले यह संकट उपभोक्ताओं के लिए नई मुश्किल खड़ी कर रहा है।
युद्ध के चलते क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जिससे प्लास्टिक (पॉलीमर) की कीमतों में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो गई है। बोतलें बनाने वाली PET सामग्री, ढक्कन (कैप), लेबल और कार्डबोर्ड बॉक्स जैसी पैकेजिंग सामग्री की लागत भी दोगुनी से ज्यादा हो चुकी है। कई कंपनियों ने वितरकों को पत्र लिखकर कच्चे माल की बढ़ती कीमतों की जानकारी दी है और कुछ ने थोक स्तर पर ही रेट बढ़ा दिए हैं।
अगले कुछ दिनों में बढ़ेगी मुश्किलें
उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर तेल कीमतें और सप्लाई चेन की समस्याएं बनी रहीं तो आने वाले 4-5 दिनों में खुदरा बाजार में बोतलबंद पानी की कीमतें बढ़ सकती हैं। भारत में 70 फीसदी भूजल प्रदूषित होने के कारण बड़ी आबादी रोजाना पैकेज्ड पानी पर निर्भर है, इसलिए यह बढ़ोतरी आम लोगों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बनेगी। छोटे निर्माता पहले से ही वितरकों से ज्यादा रेट वसूल रहे हैं, जिसका असर जल्द ही कंज्यूमर तक पहुंचेगा।
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह सिर्फ पानी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि FMCG सेक्टर में अन्य उत्पादों पर भी असर पड़ सकता है। अगर युद्ध लंबा खिंचा तो महंगाई और बढ़ सकती है। फिलहाल कंपनियां लागत कम करने के विकल्प तलाश रही हैं, लेकिन उपभोक्ताओं को गर्मी में महंगे पानी के लिए तैयार रहना पड़ सकता है।
