नई दिल्ली। लोकसभा में गुरुवार (12 मार्च 2026) को ऊर्जा संकट पर बहस के दौरान भारी हंगामा मचा। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) युद्ध के कारण भारत में LPG और तेल संकट की बात की। उन्होंने कहा कि दर्द अभी शुरू हुआ है और अमेरिका द्वारा भारत को रूसी तेल खरीदने की इजाजत देने का पहेली सुलझ गया है। यह एक “कॉम्प्रोमाइज” है। राहुल ने पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की ओर इशारा करते हुए कहा कि पुरी खुद जेफरी एपस्टीन के दोस्त होने का स्वीकार कर चुके हैं और इसी वजह से यह समझौता हुआ।
राहुल गांधी ने एक दस्तावेज दिखाने की कोशिश की, जिसमें कथित तौर पर पुरी की बेटी और जॉर्ज सोरोस के बीच लिंक का जिक्र था। लेकिन स्पीकर ओम बिरला ने हस्तक्षेप किया और भाषण रोक दिया। उन्होंने कहा कि राहुल को सिर्फ गैस कमी के मुद्दे पर बोलने की अनुमति थी, बिना नोटिस के अन्य मुद्दे नहीं उठा सकते। सदन में विपक्षी सांसदों ने ‘एपस्टीन, एपस्टीन’ के नारे लगाए, जिससे हंगामा बढ़ गया। राहुल ने जोर देकर कहा कि यह ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा है, लेकिन स्पीकर ने नहीं माना।
विपक्ष ने फिर ‘एपस्टीन’ नारे लगाए
इसके बाद जब हरदीप सिंह पुरी ने सदन में बयान दिया तो विपक्ष ने फिर ‘एपस्टीन’ नारे लगाए, जिससे उनकी 14 मिनट की स्पीच में बार-बार व्यवधान आया। पुरी ने कहा कि देश को अफवाहों और फेक नैरेटिव से बचना चाहिए, और यह वैश्विक ऊर्जा संकट का सबसे गंभीर दौर है। उन्होंने पैनिक बुकिंग और होर्डिंग को उपभोक्ता की चिंता बताया, न कि सप्लाई की कमी। पुरी ने राहुल के आरोपों को बेबुनियाद करार दिया और देश से एकजुट रहने की अपील की।
यह घटना लोकसभा में राजनीतिक तनाव को और बढ़ा देती है, जहां ऊर्जा संकट को लेकर बहस व्यक्तिगत आरोपों में बदल गई। कांग्रेस इसे सरकार की कमजोरी बताती है, जबकि बीजेपी इसे अफवाह फैलाने का प्रयास मान रही है। स्पीकर ने सदन को सामान्य करने की कोशिश की, लेकिन नारे और हंगामा जारी रहा। कुल मिलाकर, यह सत्र ऊर्जा नीति से ज्यादा एपस्टीन फाइल्स और व्यक्तिगत हमलों का केंद्र बन गया।
