नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में UP SI भर्ती परीक्षा के दौरान एक विवादित प्रश्न से बवाल मच गया। 14 मार्च को आयोजित सब-इंस्पेक्टर (दारोगा) की लिखित परीक्षा के हिंदी सेक्शन में पूछा गया- “अवसर के अनुसार बदल जाने वाला” व्यक्ति के लिए एक शब्द चुनें। विकल्प थे- पंडित, अवसरवादी, निर्दोष (या निष्कपट), सदाचारी। “पंडित” विकल्प को ब्राह्मण समुदाय से जोड़कर देखा गया, जिससे उनकी भावनाएं आहत हुईं और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। सोशल मीडिया पर ब्राह्मण समाज और BJP नेताओं ने इसे अपमानजनक बताया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाया और सभी भर्ती बोर्ड के चेयरपर्सन्स को निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति, जाति, पंथ या सम्प्रदाय की मर्यादा एवं आस्था के विषय में अमर्यादित टिप्पणी न की जाए। पेपर सेटर्स को भी स्पष्ट निर्देश देने, हैबिचुअल ऑफेंडर्स (बार-बार गलती करने वालों) को तत्काल ब्लैकलिस्ट करने और इस मुद्दे को पेपर सेटर्स के MoU का हिस्सा बनाने के आदेश दिए। योगी ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।
डिप्टी सीएम ने भी जताई नाराजगी
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी नाराजगी जताई और कहा कि किसी समाज या वर्ग की गरिमा को ठेस पहुंचाना बिल्कुल अस्वीकार्य है। जांच के बाद जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी। BJP के प्रदेश सचिव अभिजात मिश्रा ने योगी को पत्र लिखकर “पंडित” शब्द को अपमानजनक तरीके से शामिल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, क्योंकि “पंडित” ज्ञान और सम्मान का प्रतीक है, अवसरवाद का नहीं।
UP पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPRPB) ने जांच शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। यह विवाद भर्ती प्रक्रिया की संवेदनशीलता पर सवाल उठाता है, और योगी सरकार के निर्देश भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए सख्त कदम हैं।
