नोएडा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों के हिंसक प्रदर्शन ने पुलिस व प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 13 अप्रैल को करीब 40-45 हजार मजदूर सड़कों पर उतर आए। 300 से अधिक फैक्टरियों में तोड़फोड़, आगजनी और सड़क जाम की घटनाएं हुईं। करीब तीन घंटे तक हालात पूरी तरह बेकाबू रहे।
वास्तव में यह घटना अचानक नहीं थी। 9 अप्रैल से ही मजदूर हड़ताल पर थे। अलग-अलग फैक्टरियों के बाहर धरना, नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन खुलेआम चल रहा था। 10 अप्रैल को ट्रैफिक डायवर्जन तक करना पड़ा था। इसके बावजूद नोएडा पुलिस ने पर्याप्त बल नहीं बढ़ाया और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) की रिपोर्ट को गंभीरता से नहीं लिया। सेक्टर-59, 62, 63 और फेज-2 जैसे इलाकों में मुट्ठी भर पुलिसकर्मी भीड़ के सामने बेबस नजर आए।
इंटेलिजेंस फेलियर और लापरवाही का आरोप
पुलिस पर इंटेलिजेंस फेलियर और लापरवाही का आरोप लग रहा है। हाल ही में गुरुग्राम के मानेसर में हुई हिंसा से भी सबक नहीं लिया गया। भीड़ ने कई जगहों पर संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, जिससे हाई-टेक शहर तीन घंटे तक ‘बंधक’ बना रहा। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में बाद में स्थिति नियंत्रित की गई। संयम बरतते हुए न्यूनतम बल का प्रयोग किया गया। अब तक 7 मुकदमे दर्ज कर कई लोगों को हिरासत में लिया गया है।
न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी का फैसला
पुलिस का दावा है कि फिलहाल शांति बहाल है। घटना के बाद योगी सरकार ने देर रात न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी का फैसला लिया। विभिन्न श्रेणियों में अधिकतम 3000 रुपये तक इजाफा किया गया, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। आगे वेज बोर्ड के माध्यम से स्थायी समाधान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।यह घटना दर्शाती है कि समय रहते इंटेलिजेंस और प्रशासनिक तैयारी न होने से छोटा मुद्दा भी बड़े हिंसक रूप ले सकता है।
