नई दिल्ली। बाजार में 10, 20 और 50 रुपये के छोटे मूल्य वाले नोटों की उपलब्धता को लेकर हाल ही में चिंता और अफवाहें फैली थीं। कई जगहों पर लोगों को छोटे बदलाव के लिए परेशानी हो रही थी, जिससे दुकानदारों और आम नागरिकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। इन अफवाहों के बीच सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि देश में इन छोटे नोटों की कोई कमी नहीं है और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) लगातार मांग के अनुसार मुद्रा की आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में बताया कि आरबीआई अर्थव्यवस्था की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न मूल्य के नोट और सिक्कों की निरंतर आपूर्ति करता है। वर्तमान वित्तीय वर्ष (फरवरी 2026 तक) में 10 रुपये के 439.40 करोड़, 20 रुपये के 193.70 करोड़ और 50 रुपये के 130.30 करोड़ नोट बाजार में पहुंचाए जा चुके हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में भी इन नोटों की अच्छी मात्रा छपी और वितरित की गई थी।
सुविधा बढ़ाने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू
सरकार ने जोर दिया कि छोटे लेन-देन अब डिजिटल भुगतान, सिक्कों और नोटों के मिश्रण से आसानी से हो रहे हैं। छोटे नोटों की सुविधा बढ़ाने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जिसमें विशेष ‘स्मॉल वैल्यू डिस्पेंसर’ एटीएम लगाए जा रहे हैं। ये विशेष मशीनें 10, 20 और 50 रुपये के नोट निकाल सकेंगी, जो सामान्य एटीएम में उपलब्ध नहीं होते। इस कदम से रोजमर्रा के लेन-देन में छोटे बदलाव की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां कैश पर निर्भरता अभी भी ज्यादा है।
अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील
सरकार और आरबीआई ने लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने और जरूरत पड़ने पर बैंक या आधिकारिक स्रोतों से जानकारी लेने की अपील की है। डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के बावजूद छोटे नोटों की मांग बनी हुई है, और इस दिशा में उठाए जा रहे कदम आम आदमी के लिए राहत लेकर आएंगे। स्थिति नियंत्रण में है और कोई संकट नहीं है।
