नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में राणा सांगा को लेकर एक राजनीतिक विवाद ने तूल पकड़ लिया है। यह विवाद समाजवादी पार्टी (सपा) के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन के उस बयान से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने 16वीं सदी के राजपूत शासक राणा सांगा को ‘गद्दार’ करार देते हुए दावा किया कि उन्होंने मुगल बादशाह बाबर को भारत आने का निमंत्रण दिया था। यह टिप्पणी सुमन ने संसद में गृह मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर चर्चा के दौरान की, जिसके बाद यह मुद्दा हिंसक प्रदर्शनों और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों तक जा पहुंचा।
विवाद की शुरुआत 21 मार्च को हुई, जब सुमन ने कहा कि बीजेपी नेता अक्सर मुसलमानों को बाबर का वंशज बताते हैं, लेकिन यह राणा सांगा ही थे जिन्होंने इब्राहिम लोदी को हराने के लिए बाबर को बुलाया। इस बयान से नाराज करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने 26 मार्च को आगरा में सुमन के आवास पर हमला कर दिया।
प्रदर्शनकारियों की पत्थरबाजी में कई लोग घायल
प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की, बुलडोजर लाए और पुलिस से झड़प हुई, जिसमें कई लोग घायल हुए। बीजेपी ने सपा पर इतिहास को तोड़-मरोड़ने और राजपूत गौरव का अपमान करने का आरोप लगाया, जबकि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सुमन का बचाव करते हुए बीजेपी पर इतिहास का राजनीतिकरण करने का पलटवार किया।
निमंत्रण की बजाय रणनीतिक समझौता हो सकता है: इतिहासकार
ऐतिहासिक तथ्यों की बात करें तो राणा सांगा, जो 1508 से 1528 तक मेवाड़ के शासक रहे, एक वीर योद्धा थे। उन्होंने राजपूत कबीलों को एकजुट कर दिल्ली सल्तनत के खिलाफ लड़ाई लड़ी। बाबरनामा में बाबर ने राणा सांगा के एक प्रस्ताव का जिक्र किया है, लेकिन इतिहासकारों का मत है कि यह निमंत्रण की बजाय रणनीतिक समझौता हो सकता था। अधिकांश इतिहासकार, जैसे सतीश चंद्रा, मानते हैं कि बाबर को भारत आने का न्योता दौलत खान लोदी और आलम खान लोदी ने दिया था, न कि राणा सांगा ने। 1527 में खानवा की लड़ाई में राणा सांगा ने बाबर का डटकर मुकाबला किया, जिसमें वे हार गए।
रामजीलाल सुमन ने माफी मांगने से किया इनकार
इस घटना ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और ऐतिहासिक व्याख्या पर बहस छेड़ दी है। सुमन ने माफी मांगने से इनकार करते हुए अपने बयान को ऐतिहासिक तथ्य बताया। दूसरी ओर, राजस्थान के उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राणा सांगा को भारतीय संस्कृति का रक्षक बताकर सुमन की निंदा की। यह विवाद यूपी के पहले से गरमाये राजनीतिक माहौल को और तीखा कर रहा है।