‘हॉर्मुज बंद रहेगा’, नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की धमकी, ट्रंप बोले- परमाणु हथियार बनाए तो दुनिया तबाह!

ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की धमकी

नई दिल्ली। ईरान में मोजतबा खामेनेई (अयातुल्लाह अली खामेनेई के बेटे) को नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किए जाने के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया है। 12 मार्च 2026 को उनकी पहली सार्वजनिक बयान में उन्होंने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने की कसम खाई।

उन्होंने कहा कि यह “दबाव का हथियार” बना रहेगा, अमेरिका और इजरायल के हमलों का बदला लिया जाएगा, और खाड़ी देशों में अमेरिकी बेस बंद न होने पर उन पर हमला होगा। उन्होंने शहीदों का खून (मिनाब में स्कूल हमले में बच्चियों की मौत का जिक्र) का बदला लेने और नए फ्रंट खोलने की बात कही, जिससे क्षेत्रीय युद्ध और गहरा सकता है।

अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक

डोनाल्ड ट्रंप ने तुरंत सोशल मीडिया पर जवाब दिया। उन्होंने ईरान को ईविल एम्पायर कहा और कहा कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। यह मिडिल ईस्ट और दुनिया के लिए तबाही ला सकता है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है, इसलिए बढ़ते तेल दामों से अमेरिका को फायदा हो रहा है। उन्होंने ईरान पर “फिनिश द जॉब” और “20 गुना ज्यादा जोरदार” हमले की धमकी दी, जबकि पहले ही ईरान को “वर्चुअली डिस्ट्रॉयड” बताया था।

बयानबाजी से वैश्विक बाजार में अफरा-तफरी मच गई

इस बयानबाजी से वैश्विक बाजार में अफरा-तफरी मच गई। हॉर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का 20% तेल व्यापार गुजरता है, और ईरान के हमलों (टैंकरों पर ड्रोन-मिसाइल) से पहले ही कई जहाज जल चुके हैं। तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गईं, जिससे LPG और पेट्रोलियम उत्पादों पर असर पड़ रहा है- खासकर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों में। ईरान ने कहा कि अमेरिका-इजरायल हमले बंद होने तक कोई बातचीत नहीं, और खाड़ी में ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को “आग” लगा देंगे अगर उनका हमला हुआ।

यह संकट ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध को नई ऊंचाई दे रहा है। मोजतबा खामेनेई का बयान युद्ध जारी रखने का संकेत है, जबकि ट्रंप परमाणु रोकथाम पर जोर दे रहे हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है—तेल सप्लाई बाधित, कीमतें आसमान छू रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद रहा तो ऊर्जा संकट और गहरा सकता है, और कूटनीति की बजाय सैन्य एस्केलेशन का खतरा बढ़ रहा है।

 

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