नई दिल्ली। 26/11 मुंबई हमलों के मुख्य साजिशकर्ता तहव्वुर हुसैन राणा की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) हिरासत में पूछताछ से कई अहम खुलासे हुए हैं। अप्रैल 2025 में अमेरिका से प्रत्यर्पण के बाद राणा को दिल्ली लाया गया था। NIA की 18 दिन की हिरासत के बाद अब तक की जांच में राणा के पाकिस्तान की सेना और इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के साथ गहरे संबंध सामने आए हैं। राणा, जो पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक और पूर्व सैन्य डॉक्टर है, पर आरोप है कि उसने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के साथ मिलकर 2008 के मुंबई हमलों की साजिश रची।
NIA सूत्रों के अनुसार, राणा ने अपने बचपन के दोस्त डेविड कोलमैन हेडली को मुंबई में हमले की टोह लेने के लिए अपनी इमिग्रेशन कंपनी का इस्तेमाल करवाया। हेडली ने 2006-2008 के बीच मुंबई में कई बार टोह ली और ताज होटल, ओबेरॉय होटल, और नरीमन हाउस जैसे स्थानों की जानकारी ISI और LeT को दी। राणा ने नवंबर 2008 में हमले से ठीक पहले मुंबई का दौरा किया था। NIA को संदेह है कि राणा ने दिल्ली और अन्य शहरों में भी हमलों की साजिश रची थी।
ISI के एक अधिकारी मेजर इकबाल के साथ संपर्क की बात स्वीकारी
पूछताछ में राणा ने ISI के एक अधिकारी मेजर इकबाल के साथ संपर्क की बात स्वीकारी, जिसने हमले की योजना में अहम भूमिका निभाई। राणा के दो भाई, जो पाकिस्तान सेना में हैं, और शिकागो में पाकिस्तानी कॉन्सुल जनरल से उसकी बातचीत ने जांच को और गहरा किया है। NIA अब राणा के फंडिंग स्रोतों, भारत में स्लीपर सेल्स, और LeT के अन्य सहयोगियों की जानकारी जुटा रही है।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने राणा के प्रत्यर्पण को पीएम मोदी की कूटनीतिक जीत बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत की आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में बड़ी सफलता है। राणा का मुकदमा दिल्ली की विशेष NIA अदालत में चल रहा है, और जांच से 26/11 की साजिश के और रहस्य उजागर होने की उम्मीद है।
