तेहरान। इजरायल और ईरान के बीच हवाई युद्ध ने मध्य पूर्व में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया। इजरायल ने ऑपरेशन राइजिंग लायन के तहत ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया, जिसमें 200 से अधिक लड़ाकू विमानों ने 100 से ज्यादा लक्ष्यों को निशाना बनाया। उपग्रह चित्रों और नक्शों से पता चला कि ईरान को भारी नुकसान हुआ, जिसमें नतांज और फोर्डो के परमाणु संयंत्र इस्फहान साइट और केरमांशाह व तबरिज में भूमिगत मिसाइल सुविधाएं क्षतिग्रस्त हुईं।
IAEA ने नतांज में 60% तक यूरेनियम संवर्धन करने वाले ऊपरी हिस्से के नष्ट होने की पुष्टि की। इजरायली हमलों में सात वरिष्ठ सैन्य कमांडर और नौ परमाणु वैज्ञानिक मारे गए। तेहरान के शाहरान तेल डिपो में आग लगने और एक 14 मंजिला आवासीय इमारत के ध्वस्त होने से 78 लोगों की मौत हुई, जिसमें 20 बच्चे शामिल थे।
आयरन डोम रक्षा प्रणाली ने अधिकांश मिसाइलों को रोक लिया
जवाब में, ईरान ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस III के तहत 200 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें और 100 ड्रोन दागे, जो तेल अवीव और यरुशलम सहित इजरायली शहरों पर केंद्रित थे। इजरायल की आयरन डोम रक्षा प्रणाली ने अधिकांश मिसाइलों को रोक लिया, लेकिन कुछ ने नुकसान पहुंचाया। तेल अवीव में किरयात सैन्य मुख्यालय और आवासीय परिसरों को नुकसान हुआ, जिसमें तीन इजरायली नागरिक मारे गए और दर्जनों घायल हुए। उपग्रह चित्रों से इजरायल में मामूली क्षति की पुष्टि हुई, जो ईरान की तुलना में कम थी।
इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को 90वें मिनट में बताया और हमलों को जारी रखने की चेतावनी दी। ईरान ने इजरायल के सहयोगियों की सैन्य चौकियों को निशाना बनाने की धमकी दी। भारत ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की। यह युद्ध क्षेत्रीय स्थिरता, तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन रहा है।
