नई दिल्ली। ईरान-इजरायल (अमेरिका के साथ) चल रहे युद्ध ने भारत में एलपीजी सिलेंडर को लेकर व्यापक चिंता पैदा कर दी है। मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण खाड़ी क्षेत्र से एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हुई है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से जहाजों की आवाजाही रुक गई है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक है और अपनी जरूरत का 80-90% से ज्यादा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आयात करता है।
इस वजह से वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ी हैं और सप्लाई चेन में दिक्कतें आई हैं, जिससे देश में घरेलू और कमर्शियल दोनों स्तर पर गैस की उपलब्धता पर असर पड़ रहा है।
कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पर दबाव
सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए तुरंत कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने रिफाइनरियों को घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने के निर्देश दिए हैं और इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल किया है। घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पर दबाव है। जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए सिलेंडर बुकिंग का न्यूनतम अंतर 21 से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है।
कीमतों में भी उछाल
साथ ही, वैकल्पिक देशों से अतिरिक्त आयात की कोशिश की जा रही है और एक समिति बनाई गई है जो कमर्शियल सेक्टर की जरूरतों की समीक्षा करेगी। कीमतों में भी उछाल देखा गया है। 7 मार्च 2026 से घरेलू 14.2 किलो सिलेंडर की कीमत दिल्ली में लगभग 60 रुपये बढ़कर 913 रुपये हो गई है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर में 115 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। यह करीब एक साल में पहली बड़ी बढ़ोतरी है, जो वैश्विक कीमतों के दबाव और आयात लागत बढ़ने के कारण आई है।
हालांकि, सरकार का कहना है कि घरेलू यूजर्स के लिए कोई बड़ी कमी नहीं है और रिजर्व पर्याप्त हैं, लेकिन अफवाहों से बचने की अपील की गई है।कई बड़े शहरों जैसे मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली और अन्य जगहों पर कमर्शियल एलपीजी की कमी सबसे ज्यादा महसूस हो रही है। होटल, रेस्टोरेंट और फूड बिजनेस वाले चिंतित हैं, क्योंकि सप्लाई रुकने से उनके ऑपरेशन प्रभावित हो रहे हैं।
घरेलू सिलेंडर में 2-8 दिनों की देरी की शिकायतें
कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अगर स्थिति बनी रही तो 50% तक ईटरी बंद होने का खतरा है। घरेलू सिलेंडर में 2-8 दिनों की देरी की शिकायतें आई हैं, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता मिल रही है और अस्पतालों जैसे जरूरी सेक्टर को भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।यह संकट भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल उठा रहा है, क्योंकि एलपीजी के लिए मिडिल ईस्ट पर भारी निर्भरता है और कोई बड़ा स्ट्रेटेजिक रिजर्व नहीं है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचा तो महंगाई और आपूर्ति पर और दबाव बढ़ सकता है, लेकिन सरकार के सक्रिय कदमों से घरेलू स्तर पर बड़ा संकट टल सकता है। लोगों से शांति बनाए रखने और जरूरत से ज्यादा बुकिंग न करने की सलाह दी जा रही है, ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।
