नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार रात ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत की। यह बातचीत पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे ईरान-इजरायल-यूएस युद्ध के बीच हुई, जहां तनाव चरम पर है। मोदी ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव, नागरिकों की मौत और नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पर गहरी चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि युद्ध किसी के हित में नहीं है और सभी मुद्दों को संवाद और कूटनीति से हल किया जाना चाहिए। भारत ईरान का दोस्त है, इसलिए भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा व सामान के निर्बाध परिवहन को प्राथमिकता दी जा रही है। मोदी ने निर्दोष नागरिकों और सार्वजनिक संपत्ति पर हमले को अस्वीकार्य बताया।
ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन ने भारत की संतुलित और रचनात्मक भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिका से संवाद के रास्ते पर था, लेकिन अमेरिका-इजरायल के हमलों ने अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों का उल्लंघन किया। उन्होंने मिनाब स्कूल हमले में 168 छात्राओं की मौत, इस्लामिक रिवॉल्यूशन लीडर और सीनियर कमांडर्स की शहादत का जिक्र किया और कहा कि यह पूरे इस्लामिक उम्माह का खून है, जिसका बदला लेना जरूरी है। ईरान ने युद्ध शुरू नहीं किया, बल्कि यूएस बेस से हमलों के जवाब में सेल्फ-डिफेंस में कार्रवाई की। उन्होंने इजरायल की कार्रवाइयों को स्टेट-स्पॉन्सर्ड टेररिज्म बताया।
भारत की वैश्विक मंचों पर तनाव कम करने की कोशिशों की तारीफ
ईरान की आधिकारिक बयान में भारत को दोस्त बताया गया और कहा कि मोदी का रुख युद्ध में बेस्ट और संतुलित है। पेजेशकियन ने भारत की वैश्विक मंचों पर तनाव कम करने की कोशिशों की तारीफ की। दोनों नेताओं ने BRICS और SCO जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए सहयोग जारी रखने पर सहमति जताई। ईरान ने हमलों से इंफ्रास्ट्रक्चर क्षति के बावजूद भारत जैसे दोस्तों के साथ सहयोग की प्रतिबद्धता दोहराई। मोदी ने क्षेत्रीय स्थिरता और शांति पर जोर दिया, जबकि ईरान ने कहा कि वह युद्ध बढ़ाना नहीं चाहता लेकिन आत्मरक्षा जारी रखेगा।
भारत ने कूटनीति को बढ़ावा देने की बात कही
यह बातचीत युद्ध के 13वें दिन हुई, जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित हो रहा है और तेल सप्लाई पर असर पड़ रहा है। दोनों पक्षों ने संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। भारत ने कूटनीति को बढ़ावा देने की बात कही, जबकि ईरान ने हमलों को अवैध बताते हुए न्याय की मांग की। यह कॉल ऊर्जा सुरक्षा, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत मिडिल ईस्ट से बड़ी मात्रा में ऊर्जा आयात करता है।
