जेल से बाहर आते ही वांगचुक बोले – लड़ाई अभी खत्म नहीं!

करीब छह महीने हिरासत में रहने के बाद रिहा हुए लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि उनकी लड़ाई पूरे लद्दाख के हक की है। उन्होंने साफ किया कि असली जीत तभी होगी जब सिक्स्थ शेड्यूल और राज्य का दर्जा जैसी मांगें पूरी होंगी।

*व्यक्तिगत जीत नहीं, जनता की जीत ज़रूरी*

वांगचुक ने कहा कि वह व्यक्तिगत जीत को अहम नहीं मानते। उनके लिए असली जीत तब होगी जब लद्दाख के लोगों की मांगें पूरी हों और उनका भविष्य सुरक्षित हो। जेल में रहते हुए भी उन्हें भरोसा था कि न्याय मिलेगा और अदालत में उनका पक्ष मजबूत है।

*रिहाई के बाद पहला बयान*

केंद्र सरकार की बातचीत की पेशकश पर वांगचुक ने सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने इसे “विन-विन सिचुएशन” बताया और कहा कि इससे सरकार की छवि बेहतर होगी और आंदोलन कर रहे लोगों को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा।

*अनशन को बताया मजबूरी, गांधी से ली प्रेरणा*

वांगचुक ने कहा कि वह खुद अनशन नहीं करना चाहते थे, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें मजबूर किया। उन्होंने कहा कि भूखा रहना कोई नहीं चाहता, लेकिन जब हालात मजबूर करें तो ऐसे कदम उठाने पड़ते हैं। उन्होंने यह तरीका महात्मा गांधी से सीखा।

*जेल का अनुभव और सीख*

वांगचुक ने बताया कि उन्होंने खुद को 12 महीने जेल में रहने के लिए मानसिक रूप से तैयार कर लिया था। जेल में रहना आसान नहीं था, लेकिन वहां के अनुभव ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया। उन्होंने कहा कि जेल में 70% लोग गरीब और अनपढ़ तबके से आते हैं, जिससे समाज और व्यवस्था में बदलाव की ज़रूरत साफ होती है।

*हिंसा की जांच और संवाद की उम्मीद*

24 सितंबर को हुई हिंसा का जिक्र करते हुए वांगचुक ने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब आगे बढ़ने का समय है और लद्दाख में सकारात्मक माहौल बनाना ज़रूरी है। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य मांगें अभी भी अधूरी हैं।

*संघर्ष लंबा भी चल सकता है*

वांगचुक ने कहा कि अगर बातचीत से समाधान नहीं निकला तो संघर्ष लंबा भी चल सकता है। यह सिर्फ छह महीने का मामला नहीं है, बल्कि ज़रूरत पड़ी तो छह साल तक भी जारी रह सकता है। उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताया और कहा कि अदालत में जो कुछ हुआ, उससे उनका विश्वास और मजबूत हुआ है।

*आगे की रणनीति*

अंत में वांगचुक ने कहा कि वह जल्द ही लद्दाख लौटेंगे और वहां के नेताओं से बातचीत करेंगे। इसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। उनका मकसद हमेशा से शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालना रहा है और आगे भी वही प्रयास जारी रहेगा।

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