नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने सोमवार को बिगड़ते वायु प्रदूषण का हवाला देते हुए भारत की राष्ट्रीय राजधानी के रूप में दिल्ली के बने रहने पर संदेह जताया। एक्स पर एक पोस्ट में कांग्रेस सांसद ने दिल्ली की खतरनाक वायु गुणवत्ता पर प्रकाश डाला और कहा कि यह दुनिया के दूसरे सबसे प्रदूषित शहर ढाका से लगभग पांच गुना खराब है। उन्होंने स्थिति को भयावह बताया और वर्षों की बदतर स्थिति के बावजूद इस मुद्दे को सुलझाने में विफल रहने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की।
उन्होंने लिखा, “हमारी सरकार वर्षों से इस दुःस्वप्न को देख रही है और इसके बारे में कुछ नहीं करती है।” थरूर ने अपने पिछले प्रयासों का भी उल्लेख किया, जिसमें 2015 से विशेषज्ञों और विभिन्न एजेंसियों के साथ वायु गुणवत्ता गोलमेज सम्मेलन चलाना भी शामिल है, जिसे उन्होंने प्रगति की कमी के कारण पिछले साल छोड़ दिया था।
शशि थरूर ने पहले भी दर्ज की आपत्ति
कांग्रेस के दिग्गज नेता ने दिल्ली को नवंबर से जनवरी तक तीन महीनों के लिए ‘निर्जन’ और बाकी के लिए ‘मुश्किल से रहने योग्य’ कहा। उन्होंने कहा, “क्या इसे देश की राजधानी भी रहना चाहिए?” यह पहली बार नहीं है जब शशि थरूर ने दिल्ली के वायु प्रदूषण को लेकर केंद्र पर कटाक्ष किया है। इस महीने की शुरुआत में, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 462 तक पहुंच गया, तो उन्होंने व्यंग्यात्मक तस्वीर साझा किया था, जिसमें दिल्ली के प्रतिष्ठित स्थानों का नाम बदलकर ‘प्रदूषित दिल्ली,’ ‘हजा खास’, ‘धुआं कुआं’ और ‘चांदनी चोक’ रखा गया।
दुनिया में सबसे खराब वायु गुणवत्ता दिल्ली की: शशि थरूर
एक और चुटकी लेते हुए थरूर ने टिप्पणी की, “कोई आश्चर्य नहीं कि सरकार ने मुख्य सड़क का नाम बदलकर ‘मर्तव्य पथ’ रख दिया!” दिल्ली के प्रदूषण स्तर ने व्यापक चिंता पैदा कर दी है, राष्ट्रीय राजधानी में सर्दियों के महीनों के दौरान अक्सर दुनिया में सबसे खराब वायु गुणवत्ता दर्ज की जाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और केंद्र सरकार को लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) को लागू करने में देरी के लिए सोमवार को दिल्ली सरकार और केंद्र के वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की तीखी आलोचना की, क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता ‘गंभीर प्लस’ श्रेणी में पहुंच गई थी। अदालत ने आदेश दिया कि ग्रेप के तहत स्टेज 4 प्रतिबंध अगली सूचना तक प्रभावी रहेंगे।
