सोनम वांगचुक को जोधपुर जेल से रिहा किया गया: लद्दाख में शांति बहाल होने पर केंद्र का फैसला

सोनम वांगचुक को जोधपुर जेल से रिहा किया गया

नई दिल्ली। सोनम वांगचुक, प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता, इंजीनियर और शिक्षा सुधारक, को 26 सितंबर 2025 को लद्दाख पुलिस ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी का मुख्य कारण लेह में 24 सितंबर 2025 को हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन थे, जहां लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची के तहत संरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई और 90 से अधिक लोग घायल हुए। प्रशासन ने वांगचुक को हिंसा भड़काने वाला प्रमुख व्यक्ति माना और उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया।

गिरफ्तारी के बाद उन्हें लद्दाख से बाहर राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां एनएसए के तहत उन्हें करीब 140 दिनों से अधिक (लगभग 6 महीने) रखा गया। उनकी पत्नी त्सेरिंग अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में हिरासत को चुनौती दी, जहां केंद्र सरकार ने दावा किया कि वांगचुक के भाषण और सोशल मीडिया पोस्ट उकसाने वाले थे और उनकी हिरासत से लद्दाख में हिंसा और अशांति पर नियंत्रण हो गया। सरकार ने अदालत में कहा कि सीमावर्ती संवेदनशील क्षेत्र में शांति बहाल हुई।

केंद्र का तत्काल प्रभाव से रिहा करने का फैसला

14 मार्च 2026 को केंद्र सरकार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से रिहा करने का फैसला किया। गृह मंत्रालय के अनुसार, रिहाई का कारण लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास बनाए रखना है, ताकि हितधारकों के साथ संवाद आगे बढ़ सके। मंत्रालय ने कहा कि हिरासत समाप्त करने का निर्णय विस्तृत विचार-विमर्श के बाद लिया गया, क्योंकि क्षेत्र में बंद, विरोध और आर्थिक प्रभाव (छात्रों, युवाओं, व्यापारियों, पर्यटन पर) से नुकसान हो रहा था। सरकार ने उम्मीद जताई कि मुद्दे हाई-पावर्ड कमेटी और संवाद से हल होंगे।

वांगचुक की रिहाई से आंदोलनकारियों में राहत

रिहाई के बाद लद्दाख में राज्य दर्जा, छठी अनुसूची और विकास की मांगों पर बातचीत की दिशा महत्वपूर्ण होगी। वांगचुक की रिहाई से आंदोलनकारियों में राहत है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए सुरक्षा उपाय और संवाद जारी रहेंगे। यह घटना लद्दाख की राजनीतिक और पर्यावरणीय चिंताओं को फिर से उजागर करती है।

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