ईरान-इजरायल वॉर से भारत में बढ़ी महंगाई, लेकिन सस्ते हो गए अंडे; आखिर क्या है वजह?

भारत में सस्ते हो गए अंडे

नई दिल्ली। भारत में अंडों की कीमतों में अचानक भारी गिरावट आई है और इसका सीधा संबंध मिडिल ईस्ट में चल रहे ईरान-यूएस-इजरायल युद्ध से जुड़ा है। आर्थिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, खाड़ी देशों (जैसे यूएई, ओमान, कतर, बहरीन) को भारत से प्रतिदिन लगभग 1 करोड़ अंडे निर्यात होते थे, जो कुल उत्पादन का करीब 80% हिस्सा था। युद्ध के कारण पोर्ट्स, एयरपोर्ट्स और शिपिंग रूट्स में रुकावट आई, जिससे निर्यात पूरी तरह ठप हो गया। परिणामस्वरूप, निर्यात के लिए तैयार अंडे घरेलू बाजार में ही बिकने लगे, जिससे आपूर्ति बढ़ गई और दाम तेजी से गिरे।

बेंगलुरु में थोक कीमतें पहले 7 रुपये प्रति अंडा के आसपास थीं, जो अब घटकर 5 रुपये (या 500 रुपये में 100 अंडे) रह गई हैं। कुछ जगहों पर थोक दर 4.20-4.80 रुपये तक पहुंच गई। खुदरा बाजार में पहले 8-9 रुपये प्रति अंडा था, अब 5.50-6 रुपये में बिक रहा है। हैदराबाद, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु के नामक्कल जैसे प्रमुख पोल्ट्री क्षेत्रों में यह गिरावट सबसे ज्यादा देखी गई। कुछ जगहों पर दर 3.30-3.50 रुपये तक लुढ़की। रमजान के दौरान खाड़ी देशों में मांग भी कम होने से अतिरिक्त स्टॉक भारत में ही खप रहा है।

मुर्गीपालकों के लिए बड़ा झटका

उपभोक्ताओं के लिए यह राहत की खबर है, क्योंकि अंडा प्रोटीन का सस्ता और पौष्टिक स्रोत बन गया है (100 ग्राम अंडे में लगभग 155 कैलोरी और 12.6 ग्राम प्रोटीन)। लेकिन मुर्गी पालकों और निर्यातकों के लिए बड़ा झटका है। नामक्कल जैसे इलाकों में रोजाना 5 करोड़ रुपये तक का नुकसान अनुमानित है। पोल्ट्री फार्मर्स को उत्पादन लागत (लगभग 4.50 रुपये प्रति अंडा) से नीचे बेचना पड़ रहा है, जिससे कई ने मुर्गियां बेच दीं या स्टॉक को कोल्ड स्टोरेज में डाल दिया।

कुल मिलाकर, युद्ध के कारण निर्यात रुकने से घरेलू बाजार में ओवरसप्लाई हुई, जो अंडों के दामों में 30-60% तक की गिरावट लाई। स्थिति तब तक बनी रह सकती है जब तक मिडिल ईस्ट में शिपिंग रूट्स सामान्य नहीं हो जाते। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में थोक दामों में मामूली रिकवरी दिख रही है, लेकिन खुदरा स्तर पर अभी राहत सीमित है।

 

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