नई दिल्ली। मध्य पूर्व में ईरान-अमेरिका संघर्ष तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ किसी भी सीजफायर या समझौते से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध खत्म करना चाहता है, लेकिन उसकी शर्तें (जैसे परमाणु कार्यक्रम छोड़ना) अमेरिका के लिए अस्वीकार्य हैं।
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान को सैन्य और आर्थिक रूप से पूरी तरह तबाह कर दिया है।अमेरिकी सेना ने ईरान के खार्ग द्वीप पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं, जो ईरान का प्रमुख तेल निर्यात केंद्र है। इन हमलों में द्वीप पर 90 से अधिक सैन्य ठिकानों को नष्ट किया गया, लेकिन तेल से जुड़े ढांचे को अभी बरकरार रखा गया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही रोकता रहा, तो तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया जाएगा।
ईरान पर फिर हमला करेंगे: ट्रंप
उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि जरूरत पड़ी तो “मजे के लिए” फिर हमला कर सकते हैं। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है या जहाजों पर हमले कर आवाजाही बाधित की है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का पांचवां हिस्सा प्रभावित हुआ है। तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है।
ईरा ने जवाबी कार्रवाई की दी धमकी
ईरान ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है, जिसमें अमेरिकी या सहयोगी देशों के ऊर्जा ठिकानों पर हमले शामिल हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता ने स्ट्रेट बंद करने को लीवरेज के रूप में इस्तेमाल करने की बात कही है।ट्रंप ने दुनिया के कई देशों (जैसे चीन, फ्रांस, जापान, ब्रिटेन आदि) से अपील की है कि वे युद्धपोत भेजकर होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित और खुला रखने में मदद करें। अमेरिका इसका समन्वय करेगा।
ईरान की ओर से अभी कोई नई प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन युद्ध में कोई समझौता नजर नहीं आ रहा। यह स्थिति एलपीजी और तेल संकट को और गहरा कर रही है, जिससे भारत जैसे आयातक देश प्रभावित हो रहे हैं।
