विवाद के बीच यूपीएससी ने रद्द किया लेटरल एंट्री का विज्ञापन, केंद्र ने सामाजिक न्याय पर फोकस का दिया हवाला

विवाद के बीच यूपीएससी ने रद्द किया लेटरल एंट्री का विज्ञापन

नई दिल्ली। विरोध के बीच संघ लोक सेवा आयोग ने मंगलवार को केंद्रीय मंत्रालयों में शीर्ष पदों पर लेटरल एंट्री का विज्ञापन रद्द कर दिया गया। विज्ञापन जारी होने के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया था। विपक्ष और एनडीए दोनों सहयोगियों ने इस कदम की आलोचना की थी। इससे पहले केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने यूपीएससी से अपना विज्ञापन रद्द करने को कहा। जितेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों का हवाला देते हुए यूपीएससी चेयरपर्सन प्रीति सूदन को पत्र लिखा।

अपने पत्र में जितेंद्र सिंह ने कहा कि संविधान में निहित समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप लेटरल एंट्री की आवश्यकता है। सिंह ने कहा कि पीएम मोदी के लिए सार्वजनिक रोजगार में आरक्षण हमारे सामाजिक न्याय ढांचे की आधारशिला है जिसका उद्देश्य ऐतिहासिक अन्याय को संबोधित करना और समावेशिता को बढ़ावा देना है।”

कांग्रेस ने राहुल गांधी को दिया श्रेय

पत्र में कहा गया है, “चूंकि इन पदों को विशिष्ट माना गया है और एकल-कैडर पदों के रूप में नामित किया गया है, इसलिए इन नियुक्तियों में आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं किया गया है।” कांग्रेस ने इस विज्ञापन की दलितों, ओबीसी और आदिवासियों पर हमला के रूप में कड़ी आलोचना की थी। कांग्रेस ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और विज्ञापन को वापस लेने के लिए राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के अभियान को श्रेय दिया।

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ट्वीट किया, “हम हर कीमत पर संविधान और आरक्षण व्यवस्था की रक्षा करेंगे। हम किसी भी कीमत पर बीजेपी की ‘लेटरल एंट्री’ जैसी साजिशों को नाकाम करेंगे। हम 50% आरक्षण सीमा को तोड़कर जाति जनगणना के आधार पर सामाजिक न्याय सुनिश्चित करेंगे।”

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