नई दिल्ली। अहमदाबाद में 12 जून को हुए एयर इंडिया की उड़ान AI171 के विमान हादसे ने विमानन सुरक्षा और दुर्घटना जांच के लिए अपर्याप्त फंडिंग पर संसदीय समिति की मार्च 2025 की रिपोर्ट को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। इस हादसे में लंदन जा रहे बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर ने टेकऑफ के तुरंत बाद बी.जे. मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से टकराकर आग की लपटों में घिर गया, जिसमें 241 यात्री और चालक दल के सदस्यों सहित 279 लोग मारे गए। केवल एक यात्री विश्वास कुमार रमेश जीवित बचा।
25 मार्च, 2025 को राज्यसभा में पेश परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA), विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB), और नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) को दी गई बजट राशि में असमानता पर चिंता जताई। भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार है। इसके लिए सुरक्षा और जांच क्षमताओं के लिए केवल 35 करोड़ रुपये का बजट अपर्याप्त बताया गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए DGCA को 30 करोड़ रुपये, जबकि AAIB और BCAS को क्रमशः 20 करोड़ और 15 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
विमान हादसे की जांच AAIB कर रहा
AAIB इस हादसे की जांच कर रहा है। इसे संसाधनों और विशेषज्ञों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। समिति ने सुझाव दिया कि AAIB की तकनीकी क्षमता और विशेषज्ञता बढ़ाने के लिए अधिक फंडिंग जरूरी है। प्रारंभिक जांच में इंजन, फ्लैप्स, और लैंडिंग गियर पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसमें दो ब्लैक बॉक्स 13 और 15 जून को बरामद हुए। DGCA ने एयर इंडिया के सभी बोइंग 787 विमानों की सुरक्षा जांच के आदेश दिए हैं।
समिति ने नीतिगत सुधारों की सिफारिश की
समिति ने विमानन सुरक्षा को मजबूत करने और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए नीतिगत सुधारों की सिफारिश की है। गुजरात सरकार ने पीड़ितों के परिवारों के लिए 230 सहायता टीमें और परामर्शदाता तैनात किए हैं। यह हादसा भारत में 1996 के बाद सबसे घातक विमानन दुर्घटना है, जिसने सुरक्षा और जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
