नई दिल्ली। उत्तर कोरिया ने 14 मार्च 2026 को एक बड़ा सैन्य प्रदर्शन करते हुए 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जो पूर्वी सागर (ईस्ट सी या सी ऑफ जापान) की ओर दागी गई थीं। ये मिसाइलें प्योंगयांग के पास सुनान इलाके से दोपहर करीब 1:20 बजे लॉन्च की गईं और समुद्र में गिर गईं। दक्षिण कोरियाई सेना (जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ) ने इसकी पुष्टि की, जबकि जापान के रक्षा मंत्रालय और कोस्ट गार्ड ने भी मिसाइलों के समुद्र में गिरने की सूचना दी। कोई हताहत या संपत्ति क्षति की रिपोर्ट नहीं है, क्योंकि मिसाइलें जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र के बाहर गिरीं।
दक्षिण कोरिया ने इसे गंभीर उकसावा करार दिया और अपनी सेना को पूरी तरह तैयार रखा है। अमेरिका और जापान के साथ मिलकर मिसाइलों की रेंज, प्रकार और अन्य विवरणों का विश्लेषण किया जा रहा है। यह लॉन्च ऐसे समय हुआ जब दक्षिण कोरिया और अमेरिका ‘फ्रीडम शील्ड’ संयुक्त सैन्य अभ्यास (9-19 मार्च) चला रहे हैं, जिसे उत्तर कोरिया हमेशा आक्रामक मानता है। उत्तर कोरिया की किम यो-जोंग ने पहले ही अमेरिका-दक्षिण कोरिया अभ्यासों की निंदा करते हुए अकल्पनीय भयानक परिणामों की चेतावनी दी थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के किम जोंग-उन से बातचीत के संकेत देने के एक दिन बाद यह घटना हुई।
कार्रवाई उत्तर कोरिया की ताकत प्रदर्शन का हिस्सा
यह कार्रवाई उत्तर कोरिया की ताकत प्रदर्शन और परमाणु निवारक मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। हाल ही में उन्होंने क्रूज मिसाइलों का परीक्षण भी किया था। कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के विभाजन और 1950-53 के कोरियाई युद्ध से चला आ रहा है, जो सीजफायर पर खत्म हुआ लेकिन शांति संधि नहीं हुई। अमेरिका की दक्षिण कोरिया में सैन्य मौजूदगी और प्रतिबंध उत्तर कोरिया के लिए लगातार चुनौती बने हुए हैं।
घटना नए युद्ध मोर्चे खोलने जैसा
यह घटना वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा रही है, खासकर ईरान-यूएस-इजरायल युद्ध के बीच, क्योंकि एक साथ 10 मिसाइलें दागना असामान्य है और नए युद्ध मोर्चे खोलने जैसा माना जा रहा है। क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है, जिससे अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान की सतर्कता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बातचीत की बजाय दबाव बढ़ाने की कोशिश है, लेकिन स्थायी शांति के लिए संवाद जरूरी है।
