नई दिल्ली। कर्नाटक विधानसभा में बुधवार को मुस्लिम ठेकेदारों के लिए 4% आरक्षण का बिल पास कर दिया गया। यह आरक्षण सार्वजनिक निर्माण और ठेका परियोजनाओं में दिया जाएगा। बिल के पास होने के बाद विधानसभा में भारी हंगामा हुआ। विपक्षी दलों ने इस फैसले का विरोध किया और इसे तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया। खास बात यह रही कि यह बिल ऐसे समय में पारित हुआ, जब राज्य में हनीट्रैप कांड को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है।
बिल की मुख्य बातें:
– आरक्षण का उद्देश्य: मुस्लिम ठेकेदारों को सरकारी परियोजनाओं में 4% आरक्षण का लाभ मिलेगा।
– लागू क्षेत्र: यह आरक्षण सार्वजनिक निर्माण, ठेके और आपूर्ति परियोजनाओं में लागू होगा।
– लाभार्थी: कर्नाटक में मुस्लिम समुदाय के छोटे और मध्यम ठेकेदारों को इस आरक्षण का लाभ मिलेगा।
– उद्देश्य: सरकार का दावा है कि इसका मकसद मुस्लिम समुदाय के आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करना है।
विपक्ष का विरोध
बिल पास होने के बाद विधानसभा में विपक्षी दलों ने जोरदार हंगामा किया।
– भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है। भाजपा नेताओं ने कहा कि ठेका परियोजनाओं में आरक्षण देना पक्षपातपूर्ण और असंवैधानिक है।
– जेडीएस ने भी बिल का विरोध करते हुए इसे भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला कदम बताया।
हनीट्रैप विवाद का असर
बिल पास होने से पहले विधानसभा में हनीट्रैप कांड को लेकर जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार इस विवाद से ध्यान हटाने के लिए बिल को जबरन पारित कर रही है।
– भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार हनीट्रैप मामले में नेताओं को बचाने का प्रयास कर रही है।
– इस दौरान सदन में नारेबाजी और तीखी बहस हुई।
सरकार का बचाव
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि यह आरक्षण मुस्लिम ठेकेदारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए दिया गया है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह फैसला समाज के पिछड़े वर्ग को मुख्यधारा में लाने का प्रयास है।
