नई दिल्ली। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान और इजरायल के बीच चल रहे तीव्र संघर्ष में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरानी जनता से सीधा भावुक अपील की है। इजरायल और अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई से ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो चुकी है। कई सैन्य ठिकाने नष्ट हो गए हैं और हजारों आईआरजीसी लड़ाके मारे गए हैं। इसके बावजूद ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों से जवाबी कार्रवाई जारी रखी है, जिससे इजरायल के कई इलाकों में तबाही मची है और क्षेत्रीय स्थिति बिगड़ गई है।
नेतन्याहू ने अपने संदेश में कहा कि यह युद्ध ईरानी जनता के खिलाफ नहीं, बल्कि तेहरान के ‘तानाशाही शासन’ के खिलाफ है। उन्होंने ईरानी लोगों को ‘एक बार मिलने वाला ऐतिहासिक अवसर’ बताया और कहा कि अब समय आ गया है जब वे अपने भाग्य को खुद संभालें, तानाशाही को उखाड़ फेंकें और आजादी हासिल करें। उन्होंने ईरान की संस्कृति, संप्रभुता और विरासत का सम्मान करने का वादा किया तथा भविष्य में दोनों देशों के बीच शांति और साझेदारी की उम्मीद जताई।
वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहरा गया
हालांकि इजरायल ने बड़े हमलों के जरिए ईरानी रेजीम को कमजोर करने की कोशिश की, लेकिन ईरान ने आत्मसमर्पण नहीं किया और लगातार जवाबी हमले कर रहा है। इससे इजरायल की स्थिति कमजोर हुई दिख रही है, जिसे ‘बैकफुट’ पर आने के रूप में देखा जा रहा है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहरा गया है और मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
नेतन्याहू की यह अपील मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें वे ईरानी विपक्ष को उकसाने और जनता में असंतोष बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। ईरानी जनता से कहा गया है कि वे सड़कों पर उतरें और अपने देश को ‘आतंकवादी शासन’ से मुक्त करें। फिलहाल ईरान की ओर से इस अपील पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन संघर्ष जारी रहने से स्थिति और जटिल होती जा रही है।
