नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस ने अपने पद से इस्तीफा देने के बाद राज्य की जनता के नाम एक भावुक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने कहा कि भले ही उनका आधिकारिक कार्यकाल खत्म हो गया हो, लेकिन बंगाल से उनका रिश्ता कभी खत्म नहीं होगा। उन्होंने साफ कहा कि उनकी बंगाल की यात्रा अभी खत्म नहीं हुई है और वे आगे भी किसी न किसी रूप में राज्य से जुड़े रहेंगे।
यह पत्र लोक भवन के आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट से साझा किया गया। दिलचस्प बात यह है कि यह संदेश उस मुलाकात के एक दिन बाद सामने आया, जिसमें बोस ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात को उनके कार्यकाल के औपचारिक विदाई के रूप में देखा जा रहा है।
बंगाल को बताया दूसरा घर
अपने पत्र में बोस ने पश्चिम बंगाल को अपना दूसरा घर बताया। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में उन्होंने राज्य के अलग-अलग हिस्सों का दौरा किया और आम लोगों से गहरा जुड़ाव महसूस किया। बोस ने याद करते हुए लिखा कि उन्होंने गांवों में लोगों के साथ झोपड़ियों में बैठकर भोजन किया, युवाओं के साथ पढ़ाई पर चर्चा की और राज्य के विद्वानों से बहुत कुछ सीखा।
उन्होंने अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि कोलकाता की गलियों से लेकर गांवों की सड़कों तक, बच्चों की चमकती आंखों और बुजुर्गों के स्नेह भरे भाव में उन्हें एक खास अपनापन महसूस हुआ। अपने संदेश में उन्होंने महात्मा गांधी का एक प्रसिद्ध कथन भी याद किया। गांधी ने कभी कहा था कि “मैं बंगाल को छोड़ नहीं सकता और बंगाल मुझे जाने नहीं देगा।” बोस ने लिखा कि अब उन्हें भी वही भावना महसूस होती है।
रवींद्रनाथ टैगोर की गीतांजलि की पंक्तियों का किया उल्लेख
इसके अलावा उन्होंने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की ‘गीतांजलि’ की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि असली जीवन और ईश्वर उन लोगों के बीच मिलते हैं जो खेतों में मेहनत करते हैं और सड़कों पर पत्थर तोड़कर रास्ते बनाते हैं। पत्र के अंत में बोस ने पश्चिम बंगाल की समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने लिखा कि आने वाले समय में बंगाल नई ऊंचाइयों को छुए और राज्य के सभी लोगों के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहे। उन्होंने मां दुर्गा से भी राज्य की रक्षा और कल्याण की प्रार्थना की।
गौरतलब है कि सी. वी. आनंद बोस नवंबर 2022 से पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे। उन्होंने 5 मार्च को अपने पद से इस्तीफा दिया, जबकि उनका कार्यकाल अभी लगभग डेढ़ साल बाकी था। अब उनकी जगह तमिलनाडु के राज्यपाल रहे आर. एन. रवि को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
