नई दिल्ली। सोने और चांदी की कीमतों में हाल के महीनों में भारी गिरावट आई है। चांदी दो महीने में 50 फीसदी और सोना 30 फीसदी अपने उच्चतम स्तर से लुढ़क चुका है। 23 मार्च को एक दिन में चांदी 13 फीसदी और सोना 10 फीसदी गिर गया। इसके बावजूद विशेषज्ञ सोने-चांदी को लंबी अवधि का सुरक्षित निवेश मान रहे हैं, खासकर युद्ध, आर्थिक संकट या महंगाई के समय में इसे बेहतर माना जा रहा है।
आज के दौर में हर निवेशक को अपने पोर्टफोलियो में कम से कम 15-20 फीसदी सोना-चांदी रखना चाहिए। अगर आप इक्विटी और म्यूचुअल फंड पर पूरी तरह निर्भर हैं तो थोड़ी गलती कर रहे हैं। सोना-चांदी महंगाई के खिलाफ रुपये की क्रय शक्ति बचाते हैं और पिछले 5 सालों में इक्विटी को भी पीछे छोड़ चुके हैं। चांदी की मांग औद्योगिक उपयोग (सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन) से भी बढ़ रही है।
धीरे-धीरे स्टैगर्ड खरीदारी करें
लंबी अवधि (कम से कम 5 साल) का नजरिया रखकर निवेश करें। अगर आपके पास एक लाख रुपये हैं तो अभी 25 हजार रुपये सोने-चांदी में लगाएं। कुछ दिन इंतजार करें, अगर कीमतें और गिरें तो अगले 25 हजार रुपये और लगाएं। शॉर्ट टर्म उतार-चढ़ाव से बचें और धीरे-धीरे (स्टैगर्ड) खरीदारी करें।
विशेषज्ञों की सलाह है कि चांदी को ज्यादा तरजीह दें क्योंकि इसकी डिमांड दोहरी है। घबराने की जरूरत नहीं, क्योंकि सोना-चांदी संकट के समय वैल्यू बनाए रखते हैं और लंबे समय में कभी निराश नहीं करते। निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय सलाहकार से जरूर चर्चा करें।
