नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े 60 लाख से अधिक दावों और आपत्तियों के मामले में महत्वपूर्ण अपडेट दिया है। कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर बताया कि 60,06,675 आपत्तियों में से 47,30,000 का निपटारा बुधवार सुबह तक हो चुका है। बची हुई आपत्तियों पर 7 अप्रैल 2026 तक फैसला कर लिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच (मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के नेतृत्व में) ने इस प्रगति पर संतोष जताया और कहा कि रोजाना 1.75 लाख से 2 लाख मामलों का निस्तारण हो रहा है। CJI ने इसे “उत्साहजनक” और “आशाजनक” बताया। कलकत्ता हाईकोर्ट ने बताया कि पश्चिम बंगाल से 500 और ओडिशा-झारखंड से 200 ज्यूडिशियल अधिकारियों को इस काम पर लगाया गया है। ये अधिकारी चुनाव पंजीकरण अधिकारी और सहायक अधिकारी के रूप में काम कर रहे हैं।
19 अपीलीय ट्रिब्यूनल गठित किए गए
सुप्रीम कोर्ट ने इन ज्यूडिशियल अधिकारियों, ट्रिब्यूनल सदस्यों और स्टाफ को समय पर मानदेय और खर्चों का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग को निर्देश दिए। 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल गठित किए गए हैं, जिनकी अध्यक्षता कलकत्ता हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज कर रहे हैं। इनकी ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है और 3 अप्रैल से सुनवाई शुरू हो जाएगी।
कल्याण बनर्जी ने नए फॉर्म-6 जमा होने पर चिंता जताई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल नए दस्तावेज तभी स्वीकार करेंगे, जब उनकी सत्यता की जांच हो जाए। ट्रिब्यूनल को चुनाव आयोग के सभी रिकॉर्ड उपलब्ध कराए जाएंगे। टीएमसी वकील कल्याण बनर्जी ने नए फॉर्म-6 जमा होने पर चिंता जताई, लेकिन CJI ने संदेह फैलाने वाले बयानों पर नाराजगी व्यक्त की। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी।यह प्रक्रिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची को साफ करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
