नई दिल्ली। अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में नया खुलासा हुआ है। ट्रस्ट पदाधिकारियों ने बैंक जमा राशि में अंतर देखा तो नोट गिनने वाले कमरे में हिडन कैमरे लगवाए गए। एक सप्ताह की फुटेज में कर्मचारियों का काला खेल सामने आया। कुछ कर्मचारी सीसीटीवी के सामने खड़े होकर साथियों को नोट चुराने का मौका देते थे, जो उन्हें कपड़ों में छुपा लेते थे। इस खुलासे के आधार पर ही आठ नामजद और अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
चोरी दो स्तरों पर हो रही थी। कर्मचारी हर गड्डी में एक्स्ट्रा नोट जोड़ देते थे। बैंक गिनती के समय सिर्फ गड्डियां गिनी जातीं, जिससे वाउचर बन जाता। बैंक जाते समय एक्स्ट्रा नोट निकाल लिए जाते थे। एक दानपेटी में 6-7 लाख रुपये जमा होते थे, लेकिन 500 रुपये की गड्डियों में कमी नजर आने लगी थी। साथ ही जेवरात (बाली, झुमकी, कंगन आदि) भी चुराए जा रहे थे। चोरी पहले होती, बाद में लिखा-पढ़ी की जाती थी।
किसकी मिलीभगत, चंपत राय का ड्राइवर भी शामिल
टिन्नू यादव (राम शंकर यादव) चंपत राय के ड्राइवर थे और व्यवस्थापक के रूप में काम करते थे। उन्होंने अपने चचेरे भाई मनीष यादव को नोट गिनने की ड्यूटी दिलाई। अनुकल्प मिश्रा ने अपने बहनोई लवकुश मिश्रा को शामिल किया। सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, अविनाश पांडे समेत कई कर्मचारी एक-दूसरे के परिचित या सिफारिशी थे। लवकुश मिश्रा के घर से करीब 10 लाख रुपये बरामद हुए। ड्यूटी खत्म होने पर तलाशी न लेने की लापरवाही ने चोरी को बढ़ावा दिया।
जांच जारी, ट्रस्ट की शिकायत पर कार्रवाई
ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर राम जन्मभूमि थाने में FIR दर्ज हुई है। SIT जांच कर रही है। अविनाश पांडे जैसे आरोपियों ने चोरी की रकम अपने बैंक खातों में भी जमा की थी। मामले में चंपत राय का नाम FIR में नहीं है, लेकिन उनके ड्राइवर का शामिल होना चर्चा में है। पुलिस आगे और लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। यह मामला राम मंदिर की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा कर रहा है।
