अहमदाबाद। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अपने रिटायरमेंट प्लान का खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि वह रिटायरमेंट के बाद अपना जीवन वेदों, उपनिषदों और प्राकृतिक खेती को समर्पित करेंगे। 60 वर्षीय शाह ने अहमदाबाद में ‘सहकार संवाद’ कार्यक्रम में यह बात कही। अमित शाह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रमुख रणनीतिकार भी हैं।
शाह ने रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों पर चिंता जताते हुए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों से उगाई गई फसलें ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, थायरॉइड और कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकती हैं। अपने अनुभव साझा करते हुए शाह ने बताया कि उन्होंने अपने खेत में प्राकृतिक खेती अपनाई, जिससे फसल की पैदावार 1.5 गुना बढ़ गई। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी में पानी का रिसाव बेहतर होता है और केंचुए जैसे प्राकृतिक उर्वरक उत्पादक सुरक्षित रहते हैं।
सहकारिता मंत्रालय चार वर्षों से किसानों के लिए काम कर रहा: शाह
शाह ने सहकारिता क्षेत्र की तारीफ की और इसे किसानों के लिए बाजार तक पहुंच का जरिया बताया। उन्होंने गुजरात की मिरल बेन रबारी का उदाहरण दिया, जिन्होंने सहकारिता के जरिए ऊंटनी के दूध की बिक्री से लाभ कमाया। सहकारिता मंत्रालय के पांच सिद्धांतों – लोग, प्राथमिक कृषि ऋण समितियां, डिजिटल मंच, नीतियां और समृद्धि – पर जोर देते हुए शाह ने कहा कि यह मंत्रालय पिछले चार वर्षों से किसानों के कल्याण के लिए काम कर रहा है।
यह खबर न केवल शाह के व्यक्तिगत दृष्टिकोण को दर्शाती है, बल्कि प्राकृतिक खेती और सहकारिता के महत्व को भी उजागर करती है। उनके इस बयान ने पर्यावरण और कृषि के प्रति उनकी गहरी सोच को सामने लाया है।
