मिडिल ईस्ट वॉर के बीच भारत की कूटनीतिक जीत: होर्मुज से भारतीय जहाज रवाना, ईरान ने इंडिया को बताया दोस्त

होर्मुज से भारतीय जहाज रवाना

नई दिल्ली। ईरान ने भारत को बड़ी राहत देते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय जहाजों और तेल टैंकरों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी है। ईरान के भारत में राजदूत मोहम्मद फतहाली ने 13 मार्च को नई दिल्ली में मीडिया से कहा, “हां, क्योंकि भारत हमारा दोस्त है। आप 2-3 घंटे में देख लेंगे।” उन्होंने भारत और ईरान के बीच साझा हितों और ऐतिहासिक सहयोग का जिक्र किया, जिसमें युद्ध के बाद भारत की मदद भी शामिल है। यह फैसला ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हालिया फोन बातचीत (तीसरी बार) के बाद आया, जहां जहाजों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर फोकस था।

यह संकेत पश्चिम एशिया में चल रहे ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच आया है, जहां ईरान ने IRGC के जरिए होर्मुज पर सख्त नियंत्रण बढ़ाया है। इस संकीर्ण जलमार्ग से दुनिया का 20% से ज्यादा कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस गुजरती है। ईरान ने चेतावनी दी है कि बिना अनुमति के जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है, जिससे शिपिंग ट्रैफिक धीमा हो गया है और तेल कीमतें 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गई हैं। भारत के लिए यह रूट बेहद अहम है। यहां से 40% से ज्यादा कच्चा तेल आयात होता है। किसी भी रुकावट से LPG, पेट्रोल और डीजल की कमी बढ़ सकती है और कीमतें और उछल सकती हैं।

20 से ज्यादा टैंकरों के लिए बातचीत जारी

भारतीय कूटनीति सफल रही। जयशंकर-अराघची बातचीत के बाद दो भारतीय टैंकर (पुष्पक और परिमल) सुरक्षित गुजर चुके हैं, जबकि 20 से ज्यादा अन्य टैंकरों के लिए बातचीत जारी है। ईरान ने भारत को “दोस्त” बताते हुए स्पेशल छूट दी है, लेकिन साफ कहा कि सभी जहाजों को उसकी अप्रूवल लेनी होगी- अन्यथा खतरा रहेगा। अमेरिका, इजरायल और यूरोपीय जहाजों पर सख्ती बरती जा रही है। भारत ने चाबहार पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट्स में ईरान का साथ दिया है, जिससे रिश्ते मजबूत हैं।

यह विकास भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी राहत है। होर्मुज बंद होने पर सप्लाई चेन प्रभावित होती और वैश्विक तेल बाजार में और अस्थिरता आती। भारत ने ईरान से संपर्क बनाए रखा ताकि भारतीय जहाज, क्रू और ऊर्जा आयात सुरक्षित रहें। विशेषज्ञ इसे भारत की संतुलित विदेश नीति की जीत मान रहे हैं—दोस्ती बनाए रखते हुए राष्ट्रीय हितों की रक्षा। हालांकि स्थिति संवेदनशील है, और ईरान ने कोई फॉर्मल एग्रीमेंट से इनकार किया है, लेकिन अनौपचारिक आश्वासन से भारतीय टैंकर आगे बढ़ रहे हैं।

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