नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार ने मुख्यमंत्री बनने के बाद उज्जैन में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी है। इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2023 में शपथ लेने के बाद परिवार और जुड़ी कंपनियों ने 137 भूखंडों में करीब 168 एकड़ जमीन 45 करोड़ रुपये में खरीदी। ये जमीनें उन इलाकों में हैं जहां सरकार नए हाईवे और सड़क परियोजनाएं चला रही है तथा लैंड यूज नियमों में बदलाव किया गया है।
परिवार के सदस्यों और कंपनियों ने गंगेड़ी, उनहेल, जयवंतपुरा समेत कई क्षेत्रों में निवेश किया। रिपोर्ट बताती है कि खरीदी गई 168 एकड़ में से करीब 111 एकड़ जमीन नई सड़क और हाईवे परियोजनाओं के आसपास है। गंगेड़ी में उज्जैन-इंदौर और उज्जैन-बड़नगर हाईवे जंक्शन के पास 51 एकड़ तथा उनहेल में नए हाईवे के दोनों ओर 29 एकड़ जमीन ली गई। स्थानीय कारोबारियों के अनुसार इन परियोजनाओं से जमीन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है।
सीएम बनने से पहले थी 150 एकड़ से ज्यादा जमीन
इससे पहले परिवार के पास भी उज्जैन में काफी जमीन थी। मुख्यमंत्री बनने से पहले 108 प्लॉटों में 150 एकड़ से ज्यादा जमीन थी, जिनमें से 85 एकड़ शिक्षा मंत्री रहते हुए खरीदी गई। उज्जैन मास्टर प्लान 2035 के तहत कई कृषि भूमि को आवासीय-व्यावसायिक उपयोग के लिए बदला गया, जहां परिवार की जमीनें हैं। कुछ जमीनों को बाद में हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में विकसित किया जा रहा है।
कांग्रेस ने सीएम पर उठाए सवाल
कांग्रेस ने इस मामले को हितों के टकराव का मुद्दा बनाया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सवाल उठाया कि ‘सत्ता की सड़कें किसकी संपत्ति बढ़ा रही हैं?’ मुख्यमंत्री कार्यालय को सवाल भेजे गए, लेकिन कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला। परिवार के सदस्यों ने इसे पुराना रियल एस्टेट कारोबार बताया और कहा कि 2020 से कई डील्स शुरू हो चुकी थीं। यह मामला राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है।
