नई दिल्ली। हाल ही में अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे की शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आई है। यह हादसा 12 जून को हुआ था, जब लंदन जाने वाला एयर इंडिया का बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान टेकऑफ के कुछ सेकंड बाद ही एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में जा गिरा। इस भयानक हादसे में 242 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों में से केवल एक व्यक्ति जीवित बचा, जबकि 260 लोग मारे गए, जिनमें जमीन पर मौजूद 19 लोग भी शामिल थे।
एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने बताया कि भारत के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) की शुरुआती रिपोर्ट में विमान या इसके इंजनों में कोई मैकेनिकल या रखरखाव से जुड़ी खराबी नहीं पाई गई। जांच में पता चला कि टेकऑफ के तुरंत बाद विमान के दोनों इंजनों के फ्यूल कंट्रोल स्विच रन से कटऑफ पोजीशन में चले गए, जिससे इंजनों को ईंधन मिलना बंद हो गया और विमान की शक्ति कम हो गई। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में एक पायलट को दूसरे से पूछते सुना गया कि तुमने फ्यूल क्यों बंद किया? जिसका जवाब था, “मैंने नहीं किया।”
पक्षी से टकराने या ईंधन में खराबी जैसे कारणों को खारिज किया
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि विमान का रैम एयर टरबाइन (आरएटी) तुरंत सक्रिय हो गया, जो इंजनों के फेल होने पर आपातकालीन शक्ति देता है। हालांकि, विमान इतनी कम ऊंचाई पर था कि इसे बचाने का समय नहीं मिला। जांच में पक्षी से टकराने या ईंधन में खराबी जैसे कारणों को भी खारिज किया गया है।
कुछ विशेषज्ञों ने पायलट की गलती की संभावना पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि फ्यूल स्विच को गलती से बंद करना मुश्किल है, इसके लिए जानबूझकर दो चरणों में स्विच को हिलाना पड़ता है। दूसरी ओर, कुछ का मानना है कि यह तकनीकी खराबी हो सकती है, जैसे कि स्विच का लॉकिंग मैकेनिज्म ठीक न होना।
अंतिम रिपोर्ट के लिए अभी और जांच होगी, जो एक साल में आएगी। फिलहाल, बोइंग और इंजन निर्माता जीई के लिए कोई सलाह जारी नहीं की गई है। यह हादसा भारत के विमानन इतिहास में सबसे दुखद घटनाओं में से एक है।
