नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए भीषण आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की जान गई, के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। इस हमले के जवाब में भारत ने कड़े कदम उठाए, जिसमें 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित करना, अटारी-वाघा चेकपोस्ट बंद करना और पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करना शामिल है। इस बीच, अमेरिका ने दोनों देशों से “जिम्मेदार समाधान” की अपील की है।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने रॉयटर्स को बताया कि अमेरिका दोनों देशों के साथ कई स्तरों पर संपर्क में है और स्थिति पर नजर रख रहा है। प्रवक्ता ने कहा, “हम सभी पक्षों से जिम्मेदार समाधान के लिए मिलकर काम करने का आग्रह करते हैं।” अमेरिका ने भारत के प्रति समर्थन जताते हुए आतंकवाद की निंदा की। इस हमले की जिम्मेदारी द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली, जो पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी संगठन है।
पहलगाम अटैक में एक नेपाली नागरिक की भी हुई थी मौत
हमले में 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक मारे गए। आतंकियों ने बाइसारन घास के मैदान में पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसे ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ के नाम से जाना जाता है। भारत ने इसे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद करार दिया, जबकि पाकिस्तान ने इससे इनकार करते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि उनका देश किसी भी तटस्थ जांच में भाग लेने को तैयार है।
भारत ने जवाबी कार्रवाई में न केवल सिंधु जल संधि को निलंबित किया, बल्कि दोनों देशों के उच्चायोगों में कर्मचारियों की संख्या को 55 से घटाकर 30 करने का फैसला किया। पाकिस्तान ने भारत के इस कदम को “युद्ध की कार्रवाई” करार दिया और व्यापार संबंधों को निलंबित कर दिया।
आतंकियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान शुरू
इस हमले ने कश्मीर में पर्यटन को गहरा झटका दिया है, जहां 2024 में 35 लाख पर्यटक आए थे। सुरक्षा बलों ने आतंकियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया है, जिसमें कई संदिग्धों के घर ढहाए गए। वैश्विक स्तर पर, संयुक्त राष्ट्र और अन्य देशों ने भी इस हमले की निंदा की और भारत के साथ एकजुटता दिखाई।
