नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि की महाष्टमी गुरुवार को मनाई जाएगी। चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि 25 मार्च को दोपहर 1:50 बजे शुरू होकर 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार पूजा और कन्या पूजन दोनों 26 मार्च (गुरुवार) को ही किए जाएंगे। इस दिन मां महागौरी की पूजा का विशेष महत्व है। मां महागौरी को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए उन्हें सफेद फूल, नारियल, सफेद मिठाई या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं। सुबह और शाम दोनों समय पूजा की जा सकती है।
मान्यता है कि मां महागौरी की पूजा से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और सारे दुख-कष्ट दूर हो जाते हैं। महाष्टमी पर कन्या पूजन के दो शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। पहला मुहूर्त सुबह 6:20 बजे से 7:52 बजे तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त सुबह 10:56 बजे से दोपहर 2:01 बजे तक रहेगा।
कन्या पूजन के लिए 9 छोटी कन्याओं और एक बालक (बटुक) को देवी का स्वरूप मानकर आमंत्रित करें। उनके स्वागत में फूल बरसाएं, चरण धोएं, तिलक लगाएं, कलावा बांधें। फिर उन्हें हलवा-पूरी-चने, फल या मिठाई का भोजन कराएं। सामर्थ्य अनुसार उपहार या दक्षिणा दें और अंत में चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
महागौरी की पूजा विधि विधान से करें
नवरात्र व्रत कन्या पूजन के बिना अधूरा माना जाता है। इस दिन घर में सात्विक वातावरण बनाएं। मां महागौरी की पूजा विधि-विधान से करें। कई भक्त सुबह जल्दी उठकर पूजा शुरू करते हैं ताकि शुभ मुहूर्त का लाभ मिल सके। परिवार के सदस्य एक साथ बैठकर आरती करें और मंत्र जप करें। कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनका सम्मान करना पुण्यदायी माना जाता है। इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
नवरात्रि के शेष दिनों में भी नियमित पूजा जारी रखें
महाष्टमी का यह पावन अवसर भक्तों के लिए विशेष है। पूजा के दौरान मन में शुद्ध भाव रखें और मां से अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने की प्रार्थना करें। यदि संभव हो तो ब्राह्मण या ज्योतिषी से मुहूर्त की पुष्टि कर लें क्योंकि थोड़ी भिन्नता शहरों के अनुसार हो सकती है। नवरात्रि के शेष दिनों में भी नियमित पूजा जारी रखें। मां दुर्गा सभी भक्तों की रक्षा करें।
