नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 17 फरवरी 2025 को भारी गिरावट दर्ज की गई, जो 2011 के बाद से सबसे लंबी गिरावट का हिस्सा है। बीएसई सेंसेक्स 608.83 अंक टूटकर 75,330.38 पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 194.50 अंक गिरकर 22,734.75 पर बंद हुआ। यह गिरावट लगातार नौवें दिन जारी रही, जिससे निवेशकों में घबराहट और बेचैनी बढ़ गई है।
इस गिरावट में प्रमुख कंपनियों जैसे महिंद्रा, टाटा स्टील, एनटीपीसी, जोमैटो, टीसीएस और इन्फोसिस के शेयरों में सबसे अधिक नुकसान देखा गया। मिड कैप और स्मॉल कैप कंपनियों के स्टॉक्स में भी तेज गिरावट आई है, जिससे निवेशकों की चिंता और गहरी हो गई है।
इस गिरावट के कई कारण हैं:
-वैश्विक बाजार से कमजोर संकेत: अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के कारण भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ा है।
-विदेशी निवेशकों की निकासी: विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पूंजी निकासी से बाजार कमजोर हुआ है।
-अमेरिकी बाजार में महंगाई का असर: अमेरिका में महंगाई बढ़ने के कारण ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है।
-लाभ वसूली (प्रॉफिट बुकिंग): कई निवेशक अपने लाभ को सुरक्षित करने के लिए शेयर बेच रहे हैं, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना है।
सोमवार को बाजार खुलते ही 1,709 कंपनियों के शेयर लाल निशान में चले गए, जबकि केवल 731 कंपनियों के शेयर हरे निशान में कारोबार करते दिखे। हालांकि, सन फार्मा, हिंदुस्तान यूनिलीवर और सिप्ला जैसे शेयरों में तेजी देखने को मिली। इसके विपरीत, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, टाटा स्टील और ओएनजीसी के स्टॉक्स में गिरावट बनी रही।
आनेवाले दिनों में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालांकि, दीर्घकालिक निवेशकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि बाजार में और गिरावट आती है, तो यह अच्छी गुणवत्ता वाली कंपनियों के स्टॉक्स खरीदने का एक सुनहरा अवसर हो सकता है।
इस गिरावट के दौरान, निवेशकों की संपत्ति में लगभग ₹5 लाख करोड़ की कमी आई है, जिससे बाजार पूंजीकरण घटकर ₹3,95,79,328 करोड़ रह गया है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे बाजार की मौजूदा परिस्थितियों में सतर्क रहें और निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।
