सीबीआई ने बंद किया सुशांत केस, आत्महत्या की पुष्टि, साजिश के सबूत नहीं; रिया को मिली क्लीन चिट

नई दिल्ली। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने लगभग पांच साल बाद अपनी जांच पूरी कर ली है और इसे बंद करने की रिपोर्ट दाखिल कर दी है। 22 मार्च 2025 को सीबीआई ने मुंबई की एक अदालत में यह रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया कि सुशांत की मौत में कोई साजिश या बाहरी हस्तक्षेप का सबूत नहीं मिला।

सुशांत, जो 34 साल के थे, 14 जून 2020 को मुंबई के बांद्रा स्थित अपने घर में मृत पाए गए थे। शुरुआती जांच में मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया था, जिसके बाद पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी गला घोंटने से दम घुटने (अस्फिक्सिया) को मौत की वजह बताया गया। हालांकि, इस मामले ने देश भर में तीखी बहस और साजिश के अफवाहों को जन्म दिया।

सुशांत के पिता ने 15 करोड़ की हेराफेरी का लगाया था आरोप

सुशांत के पिता केके सिंह ने पटना में एक FIR दर्ज की थी, जिसमें सुशांत की कथित प्रेमिका रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार पर आत्महत्या के लिए उकसाने और 15 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाया गया था। इसके बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया। रिया ने इन आरोपों से इनकार किया और अपनी शिकायत में सुशांत की बहनों पर गलत दवाइयां देने का आरोप लगाया।

आत्महत्या के लिए उकसाने या साजिश का कोई सबूत नहीं

जांच के दौरान रिया को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने ड्रग्स से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था, जिसमें वह 28 दिन जेल में रहीं और बाद में जमानत पर रिहा हुईं। सीबीआई ने विशेषज्ञों की राय, फोरेंसिक रिपोर्ट्स और गवाहों के बयानों के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि आत्महत्या के लिए उकसाने या किसी साजिश का कोई सबूत नहीं है।

कांग्रेस ने बीजेपी पर राजनीतिक लाभ लेने का लगाया आरोप

इसके साथ ही, महाराष्ट्र कांग्रेस ने बीजेपी पर सुशांत की मौत को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। कांग्रेस का कहना था कि बीजेपी ने इसे महा विकास आघाडी सरकार को बदनाम करने और बिहार चुनाव में फायदा उठाने के लिए उछाला। रिया के वकील ने सीबीआई के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि रिया को बेवजह परेशान किया गया।

सुशांत के प्रशंसक अभी भी उठा रहे हैं सवाल

दूसरी ओर, कुछ लोगों का मानना है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी नहीं थी। सुशांत के प्रशंसक अभी भी सवाल उठा रहे हैं, लेकिन सीबीआई का कहना है कि यह एक स्पष्ट आत्महत्या का मामला था। अब अदालत इस रिपोर्ट को स्वीकार करती है या आगे जांच का आदेश देती है, यह देखना बाकी है।

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