ढाका। बांग्लादेश ने भारत को दरकिनार करने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि हाल ही में चीन और पाकिस्तान के साथ हुई त्रिपक्षीय बैठक राजनीतिक नहीं थी। यह बैठक चीन के कुनमिंग में दो क्षेत्रीय आयोजनों- चीन-दक्षिण एशिया प्रदर्शनी और चीन-दक्षिण एशिया सहयोग मंच के दौरान हुई। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह एक अनौपचारिक मुलाकात थी, जिसका उद्देश्य व्यापार, निवेश, कृषि और डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग बढ़ाना था, न कि भारत के खिलाफ कोई गठबंधन बनाना।
यह बयान भारत-बांग्लादेश संबंधों में हाल के तनाव के बीच आया है, जो अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद शुरू हुआ। हसीना के शासनकाल में भारत और बांग्लादेश ने सीमा समझौते, आतंकवाद विरोधी सहयोग और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के माध्यम से स्वर्णिम दौर का अनुभव किया था।
हालांकि, अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले और मंदिरों की तोड़फोड़ ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारत ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और सीमा स्थिरता पर जोर दिया है, लेकिन यूनुस ने इन हमलों को अतिशयोक्तिपूर्ण प्रचार करार दिया।ॉॉ
बैठक की टाइमिंग ने भारत में संदेह पैदा किया
बैठक की टाइमिंग ने भारत में संदेह पैदा किया, खासकर क्योंकि यह भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच हुई, जिसमें हाल ही में कश्मीर में आतंकी हमले के बाद सैन्य कार्रवाइयां हुईं। बांग्लादेश के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यूनुस की बीजिंग यात्रा को संदेश बताया था, जिसे भारत ने अपने हितों के खिलाफ माना। हालांकि, बांग्लादेश ने जोर देकर कहा कि वह भारत के साथ अपने संबंधों को महत्व देता है और किसी भी गलतफहमी को दूर करने के लिए संवाद को तैयार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की मेजबानी में यह बैठक दक्षिण एशिया में उसकी बढ़ती रणनीतिक उपस्थिति को दर्शाती है, लेकिन बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था भारत पर निर्भर है, इसलिए वह तनाव को बढ़ाने से बचेगा। भारत अब बांग्लादेश के साथ सतर्क कूटनीति पर ध्यान दे रहा है।
