नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में इंदौर से ओंकारेश्वर और खंडवा जाने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। एनएचएआई द्वारा तेजाजीनगर से बलवाड़ा तक 33.40 किलोमीटर लंबा नया फोरलेन हाईवे प्रोजेक्ट तेजी से बन रहा है, जिसका मुख्य लक्ष्य प्रसिद्ध ‘भेरूघाट’ को पूरी तरह खत्म करना है। यह क्षेत्र पिछले कई वर्षों से ‘डेथ घाट’ के नाम से कुख्यात रहा है, जहां तीखे मोड़, गहरी खाइयां और खराब दृश्यता के कारण लगातार हादसे होते रहे हैं।
पिछले तीन सालों में इन ब्लैक स्पॉट्स पर 170 से ज्यादा दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 112 लोगों की जान गई। नया रूट इन खतरनाक सेक्शन को बायपास करेगा और यात्रा को सुरक्षित बनाएगा। प्रोजेक्ट की सबसे खास बात तीन आधुनिक सुरंगें हैं, जो पहाड़ों को चीरकर बनाई जा रही हैं। पहली सुरंग भेरूघाट में 575 मीटर लंबी, दूसरी बाईग्राम में 480 मीटर और तीसरी चौरल घाट में 550 मीटर की है।
कई अंडरपास व कल्वर्ट भी बनाए जा रहे
इन सुरंगों के निर्माण में न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल्ड ब्लास्टिंग जैसी उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचे और संरचना मजबूत बने। इसके अलावा एक बड़ा ब्रिज, रेलवे ओवरब्रिज, दो वायडक्ट (एक 400 मीटर लंबा और 35 मीटर ऊंचा) और कई अंडरपास व कल्वर्ट भी बनाए जा रहे हैं। यह सब मिलकर घाट क्षेत्र को सरपट दौड़ने लायक बना देगा।
इंदौर से ओंकारेश्वर का सफर होगा आधा
यह नया हाईवे इंदौर से ओंकारेश्वर का सफर समय को करीब आधा कर देगा – पहले जहां 3.5 घंटे लगते थे, अब सिर्फ 2 से 2.5 घंटे में पहुंचा जा सकेगा। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि खंडवा, बुरहानपुर और महाराष्ट्र की ओर व्यापार व उद्योग भी मजबूत होगा। खासकर सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा होने से उज्जैन-ओंकारेश्वर के दर्शन एक ही दिन में आसान हो जाएंगे, जो लाखों श्रद्धालुओं के लिए वरदान साबित होगा।
पातालपानी जलप्रपात और चौरल घाटी के खूबसूरत नजारों के बीच अब सुरक्षित यात्रा संभव होगी। प्रोजेक्ट इस साल दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है, जिसमें अभी 75-80% काम हो चुका है। एनएचएआई के इस प्रयास से न केवल सड़क सुरक्षा में क्रांति आएगी, बल्कि मध्य प्रदेश के पर्यटन और आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी। अब ‘डेथ घाट’ की यादें सिर्फ पुरानी खबरों तक सीमित रह जाएंगी।
