नई दिल्ली। भारत ने ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत में होर्मुज स्ट्रेट से फंसे 20 से अधिक तेल और गैस टैंकरों को सुरक्षित निकालने की कोशिश तेज कर दी है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्रालय स्तर पर ये वार्ता हो रही है, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची के बीच हाल के दिनों में तीन बार बातचीत हुई।
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकी दी है, जहां से दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल गुजरता है, लेकिन भारत के लिए विशेष छूट मिलने की संभावना जताई जा रही है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि भारतीय फ्लैग वाले टैंकरों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति मिल चुकी है।
युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज स्ट्रेट में फंसे टैंकरों में कच्चा तेल, एलपीजी और एलएनजी भरा हुआ है, जो भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण हैं। पहले भारत का लगभग 45% कच्चा तेल आयात इसी रास्ते से होता था, लेकिन अब सरकार ने गैर-होर्मुज रूट वाले देशों से खरीद 15% बढ़ा दी है। संसद में ऊर्जा मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया कि देश में कोई तेल संकट नहीं है, रिफाइनरियां पूरी क्षमता से चल रही हैं और पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं। हाल ही में एक लाइबेरिया फ्लैग वाला टैंकर भी होर्मुज से गुजरकर मुंबई पहुंचा, जो राहत की बात है।
सुप्रीम लीडर ने साफ कहा कि होर्मुज से नहीं गुजरेगा जहाज
ईरान के नए सुप्रीम लीडर ने साफ कहा है कि होर्मुज से कोई जहाज नहीं गुजरेगा, लेकिन भारत के साथ चल रही बातचीत से उम्मीद है कि भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिलेगा। विदेश मंत्रालय प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने पुष्टि की कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा और शिपिंग सेफ्टी पर फोकस है। हालांकि, ईरान की ओर से कुछ स्रोतों ने किसी समझौते से इनकार किया है, लेकिन भारतीय सूत्रों के मुताबिक आश्वासन मिला है।
यह स्थिति भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सरकार ने वैकल्पिक स्रोतों से सप्लाई बढ़ाकर और कूटनीति से स्थिति संभालने की कोशिश की है। अगर बातचीत सफल रही तो टैंकर निकल सकेंगे, वरना वैश्विक तेल बाजार में और उथल-पुथल मच सकती है। फिलहाल भारत में कोई ईंधन संकट नहीं है और लोग घबराने की जरूरत नहीं।
