नई दिल्ली। अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने अपनी 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में भारत को ‘कंट्री ऑफ पार्टिकुलर कंसर्न’ (CPC) घोषित करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2025 में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति और खराब हुई, जिसमें अल्पसंख्यकों पर हमले, पूजा स्थलों को निशाना बनाना और धर्म परिवर्तन विरोधी कानूनों को सख्त करने के मामले शामिल हैं।
आयोग ने अमेरिकी सरकार से मांग की कि रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर टारगेटेड प्रतिबंध लगाए जाएं, जैसे उनकी संपत्ति जब्त करना और अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगाना।
भारत में जांच की अनुमति देने की भी मांग
रिपोर्ट में आगे सिफारिश की गई है कि अमेरिका हथियार बिक्री और व्यापार नीतियों को भारत में धार्मिक स्वतंत्रता में सुधार से जोड़े। USCIRF ने ट्रांसनेशनल रिप्रेशन रिपोर्टिंग एक्ट 2024 को लागू करने और भारत में जांच की अनुमति देने की भी मांग की। यह सिफारिशें पिछले सालों से जारी हैं, लेकिन अमेरिकी सरकार ने अब तक CPC का दर्जा लागू नहीं किया है। रिपोर्ट में हिंदू राष्ट्रवादी समूहों पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है।
विदेश मंत्रालय ने हिंदू मंदिरों पर हो रहे हमले रोकने की मांग की
भारत सरकार ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया और इसे पक्षपाती, प्रेरित तथा चुनिंदा आलोचना बताया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि USCIRF बार-बार भारत की विकृत और चयनित तस्वीर पेश करता है, जो संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक कथाओं पर आधारित है, न कि वस्तुनिष्ठ तथ्यों पर। उन्होंने आयोग को सलाह दी कि वह अमेरिका में हिंदू मंदिरों पर हमलों और भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ बढ़ती असहिष्णुता पर ध्यान दे।
कुल मिलाकर, यह घटना भारत-अमेरिका संबंधों में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर जारी मतभेद को उजागर करती है। भारत इसे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप मानता है, जबकि USCIRF इसे वैश्विक निगरानी का हिस्सा बताता है। पिछले कई सालों से ऐसी रिपोर्टें आती रही हैं, लेकिन उनका व्यावहारिक असर सीमित रहा है।
