नई दिल्ली। अमेरिकी सेना को दुनिया की सबसे ताकतवर और खतरनाक सेना माना जाता है। आधुनिक हथियारों, विशाल बजट, सख्त ट्रेनिंग और वैश्विक पहुंच की वजह से यह किसी भी मोर्चे पर तुरंत हमला करने में सक्षम है। हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को ‘पाषाण युग’ में भेजने की धमकी दी, जो अमेरिकी सेना की ताकत पर भरोसा जताती है।
अमेरिका का रक्षा बजट लगभग 850 बिलियन डॉलर है, जो उसके बाद आने वाले 9-10 देशों के कुल रक्षा बजट से भी ज्यादा है। दुनिया के हर महाद्वीप में अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं, जिससे चंद घंटों में कहीं भी सैनिक और हथियार पहुंचाए जा सकते हैं।ट्रेनिंग बेहद कठिन है। बेसिक कॉम्बैट ट्रेनिंग (BCT) 10 हफ्तों की होती है, जिसमें फिजिकल स्ट्रेंथ और मेंटल टॉर्चर पर खास जोर दिया जाता है। सैनिकों को 15-20 किलो वजन लेकर मीलों दौड़ना, कीचड़-भरे रास्ते, कटीले तारों से गुजरना और बिना सोए लंबे ऑपरेशन करने की ट्रेनिंग दी जाती है।
‘द क्रूसिबल’ नाम का 54 घंटे का अंतिम टेस्ट बेहद चुनौतीपूर्ण
मरीन कॉर्प्स में ‘द क्रूसिबल’ नाम का 54 घंटे का अंतिम टेस्ट बेहद चुनौतीपूर्ण है, जिसमें न्यूनतम नींद और खाने के साथ युद्ध जैसी स्थिति झेलनी पड़ती है।भर्ती की प्रक्रिया भी काफी सख्त है। उम्मीदवार को अमेरिकी नागरिक या ग्रीन कार्ड होल्डर होना चाहिए। उम्र 17 से 35 साल के बीच होनी चाहिए। हाईस्कूल डिप्लोमा जरूरी है। ASVAB योग्यता परीक्षा पास करनी पड़ती है, जो उम्मीदवार की क्षमता के आधार पर पद तय करती है। मेडिकल टेस्ट और बैकग्राउंड चेक में ड्रग्स या आपराधिक रिकॉर्ड होने पर सीधे खारिज कर दिया जाता है।
प्राइवेट रैंक पर सालाना करीब 20-25 लाख रुपये सैलरी
सैलरी आकर्षक है। शुरुआती प्राइवेट रैंक पर सालाना 24,000 से 30,000 डॉलर (करीब 20-25 लाख रुपये) मिलते हैं। रहने-खाने का भत्ता, स्वास्थ्य सेवा मुफ्त, टैक्स-फ्री शॉपिंग और GI बिल के तहत कॉलेज शिक्षा का पूरा खर्च सेना उठाती है। युद्ध क्षेत्र में अतिरिक्त ‘हार्डशिप पे’ भी मिलता है।
अमेरिकी सेना की यह ताकत आधुनिक तकनीक, फौलादी अनुशासन और अरबों के निवेश से आती है। ट्रेनिंग इतनी सख्त है कि हर कोई इसे पूरा नहीं कर पाता। यही वजह है कि US Army को दुनिया की सबसे दमदार फौज कहा जाता है।
