नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर विस्तृत बातचीत की, जो पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर केंद्रित थी। यह दोनों के बीच 28 फरवरी 2026 के बाद तीसरी ऐसी चर्चा है, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे, जिसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की और क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया।
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि बातचीत में नवीनतम घटनाक्रमों पर गहन चर्चा हुई और दोनों पक्ष लगातार संपर्क में रहने पर सहमत हुए। चर्चा में भारत ने अपनी प्राथमिकताओं पर जोर दिया, जिसमें शांति और संवाद को बढ़ावा देना, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता बनाए रखना शामिल है। ईरान की ओर से अमेरिका-इजरायल के हमलों को ‘आक्रामक कार्रवाई’ और ‘अपराध’ बताते हुए विवरण साझा किए गए, जबकि भारत ने डी-एस्केलेशन और संयम की अपील दोहराई।
विदेश मंत्री स्तर पर बातचीत जारी
यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल परिवहन प्रभावित हो रहा है और वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा रहा है ।जयशंकर ने संसद में भी कल बताया था कि ईरान के उच्च नेतृत्व से संपर्क मुश्किल है (खामेनेई की मौत के बाद), लेकिन विदेश मंत्री स्तर पर बातचीत जारी है। भारत ने अब तक प्रभावित क्षेत्रों से करीब 67,000 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला है। जर्मनी और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रियों से भी समान चर्चाएं की गई हैं ताकि संकट के प्रभाव को कम किया जा सके।
यह फोन कॉल ईरान में नए सुप्रीम लीडर की नियुक्ति के बाद पहली प्रमुख बातचीत मानी जा रही है, जो भारत-ईरान संबंधों की मजबूती और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति भारत की सक्रिय भूमिका को दर्शाती है। दोनों पक्षों ने संकट पर नजर बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर आगे संपर्क करने का फैसला किया है, जबकि भारत डिप्लोमेसी के जरिए शांति बहाली की कोशिश जारी रखे हुए है।
