नई दिल्ली। भारत के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (DGCA) ने हाल ही में हुए एयर इंडिया विमान हादसे के बाद तीन वरिष्ठ अधिकारियों को गंभीर चूक के लिए हटाने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई 12 जून को अहमदाबाद में हुए बोइंग 787 ड्रीमलाइनर क्रैश के बाद की गई, जिसमें 241 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों सहित 270 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। हादसे में केवल एक यात्री विश्वाश कुमार रमेश जीवित बचे, जो सीट 11A पर थे।
DGCA ने पाया कि एयर इंडिया के संचालन निदेशक (ऑपरेशन्स), संचालन प्रशिक्षण प्रमुख और उड़ान सुरक्षा प्रमुख ने रखरखाव और सुरक्षा प्रोटोकॉल में गंभीर लापरवाही बरती। सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों ने बोइंग 787 की नियमित जांच और रखरखाव में कमी की, जिसके परिणामस्वरूप यह भीषण हादसा हुआ। हादसे की जांच भारत की विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) कर रही है, जिसमें अमेरिका और ब्रिटेन के विशेषज्ञ भी शामिल हैं।
बोइंग 787 बेड़े की अतिरिक्त सुरक्षा जांच का आदेश
हादसे के बाद DGCA ने एयर इंडिया के बोइंग 787 बेड़े की अतिरिक्त सुरक्षा जांच का आदेश दिया। एयर इंडिया ने 66 उड़ानें रद्द कीं और 16 अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर उड़ानें कम कीं। विमान के दोनों ब्लैक बॉक्स (फ्लाइट डेटा और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर) बरामद हो चुके हैं, जिनका विश्लेषण हादसे के कारणों का पता लगाने में मदद करेगा। प्रारंभिक जांच में इंजन विफलता, फ्लैप्स की समस्या, या पक्षी के टकराने की संभावना जताई जा रही है।
टाटा समूह ने पीड़ित परिवारों को 10 लाख रुपये देने की घोषणा की
एयर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि विमान का रखरखाव इतिहास स्वच्छ था, लेकिन जांच के निष्कर्षों का इंतजार है। इस बीच, टाटा समूह ने पीड़ित परिवारों को 10 लाख रुपये और एकमात्र बचे यात्री को 2.5 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की। हादसे ने एयर इंडिया की विश्वसनीयता और भारत के उड्डयन क्षेत्र की सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाए हैं।
