नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला सहित एक्सियॉम-4 मिशन के चालक दल की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से वापसी में देरी हो रही है। नासा ने बताया कि फ्लोरिडा तट पर खराब मौसम और ISS की तकनीकी समस्याओं के कारण वापसी की तारीख अभी तय नहीं हो सकी है। यह मिशन 14 दिनों का था, जिसमें शुभांशु शुक्ला ने कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग किए।
एक्सियॉम-4 मिशन, जिसका नेतृत्व अनुभवी अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन कर रही हैं, में शुभांशु शुक्ला पायलट की भूमिका में हैं। चालक दल ने ISS पर 60 वैज्ञानिक प्रयोग किए, जिनमें हड्डियों पर माइक्रोग्रैविटी के प्रभाव को समझने वाला ‘बोन ऑन ISS’ प्रयोग शामिल है। यह प्रयोग अंतरिक्ष में हड्डियों के कमजोर होने और पृथ्वी पर उनकी रिकवरी को समझने में मदद करेगा। शुभांशु ने माइक्रोग्रैविटी में पौधों की वृद्धि और माइक्रोएल्गी पर शोध किया, जो भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए उपयोगी हो सकता है। इसके अलावा, उन्होंने विकिरण जोखिम की निगरानी से संबंधित एक प्रयोग में भी हिस्सा लिया।
ISS के रूसी जवेज्दा मॉड्यूल में रिसाव की समस्या
वापसी में देरी का मुख्य कारण फ्लोरिडा तट पर खराब मौसम और ISS के रूसी जवेज्दा मॉड्यूल में रिसाव की समस्या है। नासा ने बताया कि अंतरिक्ष स्टेशन के आपस में जुड़े सिस्टम को पूरी तरह तैयार करने के लिए और समय चाहिए। शुभांशु के परिवार को उनकी सुरक्षित वापसी का इंतजार है। उनकी मां ने कहा, “हमें गर्व है, लेकिन अब घर वापसी की प्रतीक्षा है।”
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, चालक दल की ISS पर रहने की अवधि कम से कम चार दिन और बढ़ सकती है। इसरो ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है। यह मिशन भारत के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि शुभांशु 40 साल बाद ISS पर पहुंचने वाले पहले भारतीय हैं।
