सीजफायर के बावजूद खाड़ी देशों में दहशत: सऊदी-कतर-यूएई-कुवैत में हाई अलर्ट, एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव

सीजफायर के बावजूद खाड़ी देशों में दहशत

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दो हफ्ते के सीजफायर की घोषणा के कुछ घंटों बाद भी मध्य पूर्व में तनाव पूरी तरह कम नहीं हुआ है। खाड़ी देशों में अचानक अलर्ट सायरन बजने लगे और सुरक्षा व्यवस्था चरम पर पहुंच गई।

सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कुवैत और बहरीन ने हाई अलर्ट जारी कर अपने एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह सक्रिय कर दिए हैं। ईरान से मिसाइल और ड्रोन हमलों की आशंका के चलते पूरे क्षेत्र में डर का माहौल बन गया है।

लोगों से तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील

कुवैत की सेना ने स्पष्ट किया कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोक रहे हैं। बहरीन के इंटीरियर मंत्रालय ने लोगों से तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की। सऊदी अरब के सिविल डिफेंस ने रियाद और पूर्वी क्षेत्रों में शुरुआती चेतावनी जारी की, जिससे आम नागरिकों में भय व्याप्त हो गया।

संयुक्त अरब अमीरात ने पुष्टि की कि उसके वायु रक्षा सिस्टम ईरान से आने वाले मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने में सक्रिय हैं। कतर ने सुरक्षा खतरे को ‘हाई लेवल’ पर रखते हुए नागरिकों को घर के अंदर रहने की सलाह दी। इजरायल की सेना ने भी ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों का पता लगाने और उन्हें इंटरसेप्ट करने की बात कही।

ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलने का रखा शर्त

ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलने की शर्त पर दो हफ्ते के लिए हमले रोकने की घोषणा की थी, जिसमें इजरायल भी सहमत है। लेकिन ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अगर अमेरिका और इजरायल हमले रोक देते हैं तो ईरान भी गल्फ क्षेत्र में अपनी सैन्य कार्रवाई रोक सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि समन्वय बने रहने पर दो हफ्तों में होर्मुज से सुरक्षित आवाजाही बहाल की जा सकती है।

ईरान ने हालांकि स्पष्ट किया कि बातचीत का मतलब जंग का पूरा अंत नहीं है। जब तक 10 सूत्रीय प्रस्ताव की सभी शर्तें पूरी नहीं होतीं, संघर्ष पूरी तरह समाप्त नहीं माना जाएगा। पाकिस्तान में 10 अप्रैल से प्रस्तावित बातचीत पर सबकी नजर है। अगर यह सफल रही तो सीजफायर बढ़ाया जा सकता है।

सीजफायर के बावजूद जमीन पर स्थिति बेहद नाजुक

विश्लेषकों का मानना है कि कागजी सीजफायर के बावजूद जमीन पर स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का मुद्दा अभी भी विवाद का केंद्र है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

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