श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की जान गई, के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया। इस फैसले से बौखलाए पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी ने भारत को धमकी दी।
सुक्कुर में सिंधु नदी के किनारे एक रैली में भुट्टो ने कहा, “सिंधु हमारी है और रहेगी। या तो इसमें हमारा पानी बहेगा या उनका (भारत का) खून।” उन्होंने भारत पर हमले के लिए पाकिस्तान को झूठा दोषी ठहराने और अपनी कमजोरियों को छिपाने का आरोप लगाया।
भारत ने अटारी-वाघा सीमा बंद कर दी
भारत ने 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई इस संधि को ‘आतंकवाद के समर्थन’ के कारण निलंबित किया, जिसके तहत पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का 80% पानी मिलता है। भारत ने अटारी-वाघा सीमा बंद कर दी, पाकिस्तानी राजनयिकों को निष्कासित किया और SAARC वीजा छूट योजना रद्द की। पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई में अपनी हवाई सीमा भारतीय उड़ानों के लिए बंद की और 1972 के शिमला समझौते को निलंबित किया। पाकिस्तान ने संधि के निलंबन को “जल युद्ध” और अवैध कदम बताते हुए विश्व बैंक में शिकायत की धमकी दी।
पाकिस्तान दबाव में नहीं झुकेगा
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत के आरोपों को बेबुनियाद बताया और सबूत पेश करने की मांग की। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान दबाव में नहीं झुकेगा। भारत के जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि पाकिस्तान को पानी की एक बूंद नहीं मिलेगी। यह संधि पाकिस्तान की कृषि और जलविद्युत के लिए महत्वपूर्ण है, और इसका निलंबन वहां आर्थिक अस्थिरता ला सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आतंकियों को “पृथ्वी के छोर तक” खोजकर सजा दी जाएगी। संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की।
