विदेशी निवेशकों ने मई में भारतीय शेयर बाजार से निकाले ₹27,000 करोड़ से अधिक, जानिए बड़ी वजहें

नई दिल्ली। ग्लोबल मैक्रोइकोनॉमिक और भू-राजनीतिक माहौल में हो रहे बदलावों के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालने का सिलसिला जारी है। डिपॉजिटरी आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से ₹27,048 करोड़ से अधिक की निकासी की है।

इसके साथ ही साल 2026 में अब तक FPI द्वारा कुल बिकवाली ₹2.2 लाख करोड़ के पार पहुंच गई है, जो कि पूरे साल 2025 में हुई ₹1.66 लाख करोड़ की निकासी से भी कहीं अधिक है।

भारी बिकवाली के मुख्य कारणों में अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड यील्ड

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर बने अनिश्चित माहौल के चलते विदेशी निवेशक उभरते बाजारों जैसे कि भारत में जोखिम लेने से बच रहे हैं। इस भारी बिकवाली के मुख्य कारणों में अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड यील्ड और मजबूत होता अमेरिकी डॉलर शामिल हैं।

विकसित बाजारों में सुरक्षित संपत्तियों पर बेहतर रिटर्न मिलने के कारण निवेशक भारत जैसे बाजारों से पैसा निकालकर वहां लगा रहे हैं। इसके अलावा, दुनिया भर में बढ़ती महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती को लेकर बनी अनिश्चितता भी वैश्विक स्तर पर पूंजी के इस बदलाव को प्रभावित कर रही है।

सीधा असर भारतीय मुद्रा पर भी देखने को मिल रहा

इस निरंतर बिकवाली का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर भी देखने को मिल रहा है। लगातार पूंजी बाहर जाने और बढ़ते चालू खाता घाटे के कारण भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गया है, जिसने हाल ही में ₹96.14 प्रति डॉलर का आंकड़ा छू लिया।

बाजार विश्लेषकों का यह भी मानना है कि दुनिया भर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में भारी निवेश हो रहा है, जिससे भारत जैसे पारंपरिक रूप से मजबूत बाजारों से फंड अन्यत्र डायवर्ट हो रहा है। यदि आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और वैश्विक बाजारों में स्थिरता आती है, तभी FPI के इस रुख में बदलाव की उम्मीद की जा सकती है।

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