नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के 2022 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने अपने पद से तकनीकी इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर अपनी मूल सेवा पीसीएस में वापस भेजे जाने की अनुमति मांगी है। रिंकू सिंह राही ने इस्तीफे में बताया कि पिछले 8 महीनों से उन्हें कोई ठोस जिम्मेदारी या पोस्टिंग नहीं दी गई। वे राजस्व परिषद से अटैच थे, जहां वेतन तो मिल रहा था लेकिन काम नहीं।
उन्होंने इसे नैतिक दुविधा बताया और कहा कि पारदर्शिता बढ़ाने और अनियमितताओं के खिलाफ कदम उठाने के कारण उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। पहले भी उन्हें जान से मारने की धमकी मिली थी और एक हमले में वे गंभीर रूप से घायल होकर स्थायी दिव्यांग हो गए थे।
अखिलेश यादव ने बोला तीखा हमला
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मामले पर बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने एक्स पर लिखा, “कुशल अधिकारियों की भाजपा सरकार में कोई अहमियत नहीं है। भाजपा में तो उनकी पूछ है जिनकी चोरी के पैसों की ही चोरी हो जाती है या जो निवेश में 5% का प्रवेश शुल्क वसूल लेते हैं।”
अखिलेश ने आगे कहा कि अच्छे अधिकारियों को भावावेश में फैसला नहीं लेना चाहिए, बुरे दिन जाने वाले हैं। पीडीए सरकार आने पर सभी ईमानदार अधिकारियों को सम्मान और उचित स्थान मिलेगा।
शाहजहांपुर में संयुक्त मजिस्ट्रेट रह चुके हैं रिंकू
उन्होंने लिखा, “पीड़ा बढ़ रही है, इसीलिए पीडीए बढ़ रहा है क्योंकि जो पीड़ित, वो पीडीए।” रिंकू सिंह राही शाहजहांपुर में संयुक्त मजिस्ट्रेट रह चुके हैं। एक वायरल वीडियो में सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाने और कान पकड़कर उठक-बैठक करने के बाद उन्हें हटा दिया गया था। यह घटना उत्तर प्रदेश प्रशासनिक व्यवस्था में ईमानदार अधिकारियों की स्थिति को लेकर नई बहस छेड़ गई है।
