नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे युद्ध के बावजूद ईरान तेल निर्यात से अच्छी कमाई कर रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च महीने में ईरान अपने मुख्य कच्चे तेल ‘ईरानियन लाइट’ की बिक्री से प्रतिदिन औसतन 139 मिलियन डॉलर (लगभग 1,300 करोड़ रुपये) कमा रहा है। फरवरी में यह आंकड़ा 115 मिलियन डॉलर प्रतिदिन था। युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण मजबूत कर लिया है।
दुनिया के कुल तेल निर्यात का करीब 20 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान अपने तेल टैंकरों को खार्ग द्वीप टर्मिनल से लोड करके होर्मुज के रास्ते बाहर भेज रहा है, जबकि अन्य खाड़ी देशों के तेल जहाजों को गुजरने की इजाजत नहीं दे रहा। इससे ईरान एकमात्र बड़ा निर्यातक बन गया है जो इस महत्वपूर्ण जलमार्ग का इस्तेमाल कर पा रहा है।
ईरान सबसे ज्यादा चीन भेज रहा
ईरान का तेल निर्यात युद्ध से पहले के स्तर पर बना हुआ है। करीब 16 लाख बैरल प्रतिदिन। इसका ज्यादातर हिस्सा चीन को जा रहा है। युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। साथ ही, ईरानी तेल ब्रेंट के मुकाबले पिछले 10 महीनों में सबसे कम डिस्काउंट (मात्र 2.10 डॉलर प्रति बैरल) पर बिक रहा है। दोनों फैक्टर्स से ईरान को दोहरी फायदा हो रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने तेल बिक्री से सैकड़ों करोड़ डॉलर की अतिरिक्त कमाई की है। अमेरिका ने भी ईरानी तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है, ताकि वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव कम हो।
वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई
कोलंबिया यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ रिचर्ड नेफ्यू (पूर्व अमेरिकी अधिकारी) ने कहा कि “ट्रंप सरकार लगभग ईरान से तेल बेचने की गुहार लगा रही है।” ईरान इस कमाई का इस्तेमाल अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने और युद्ध में इस्तेमाल हुए हथियारों को फिर से भरने के लिए कर रहा है। हालांकि, होर्मुज पर तनाव जारी है और वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।
